रिम्स की अव्यवस्था की जांच करेगा झालसा, हाई कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
रांची हाई कोर्ट ने प्रतिष्ठित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में व्याप्त अव्यवस्थाओं और सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने रिम्स की लचर व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सचिव को तत्काल एक जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह जांच टीम रिम्स के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करेगी, जिनमें संस्थान का रखरखाव, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति, बाहरी दवा खरीद की प्रक्रिया, स्वच्छता की स्थिति, चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता और डॉक्टरों द्वारा की जा रही निजी प्रैक्टिस जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मशीनों की उपलब्धता और उनकी कार्यक्षमता का भी बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि रिम्स की स्थिति अभी भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। रिम्स की शासी निकाय (जीबी) की बैठकों में लिए गए निर्णय निर्धारित समय सीमा के भीतर लागू नहीं किए जा रहे हैं, जबकि पूर्व में अदालत ने इन निर्णयों को दो माह के भीतर लागू करने का निर्देश दिया था। इस पर अदालत ने मौखिक रूप से चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जीबी की बैठक में हुए निर्णयों का पालन नहीं किया जाता है, तो वह अवमानना का मामला भी चला सकती है।
अधिवक्ता ने दैनिक जागरण में प्रकाशित रिम्स में कंबल और बेडशीट न दिए जाने की खबर का भी हवाला दिया और अदालत से इसकी जांच कराने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि रिम्स और सरकार केवल शपथ पत्र दाखिल करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। अदालत ने इस मुद्दे को भी जांच टीम के दायरे में शामिल करने का निर्देश दिया है।
प्रार्थियों की ओर से रिम्स की स्थिति की पारदर्शी जांच के लिए एक विशेष टीम के गठन का आग्रह किया गया था। इसी के आलोक में हाई कोर्ट ने झालसा सचिव को निर्देश दिया है कि वे एक जांच समिति का गठन करें और उसे रिम्स भेजकर सभी व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करवाएं। अदालत ने जांच रिपोर्ट दस दिनों के भीतर कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, और मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर को निर्धारित की है। अदालत ने प्रार्थी को भी सरकार और रिम्स द्वारा दाखिल किए गए शपथपत्रों और 10 अक्टूबर 2025 के निर्देशों के आलोक में किए गए कार्यों का ब्योरा टेबुलर चार्ट के माध्यम से कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि स्थिति का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
