पहाड़ों में भालुओं के बढ़ते हमलों पर वन विभाग अलर्ट, सुरक्षा के लिए बनाया मास्टर प्लान
पहाड़ी क्षेत्रों में हाल के दिनों में भालुओं के बढ़ते हमलों और मानव-भालू संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। सूत्रों के अनुसार, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने सभी वन संरक्षकों, निदेशकों और प्रभागीय वनाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बताया गया है कि सामान्यतः शीत ऋतु भालुओं की सुप्त अवस्था होती है, लेकिन बदलते मौसम, भोजन की कमी, कूड़े का अनुचित निपटान और मानवीय आबादी के बढ़ते दबाव जैसे कारणों से कई क्षेत्रों में भालू असामान्य रूप से सक्रिय देखे जा रहे हैं। इस असामान्य सक्रियता के कारण मानव-भालू संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के इंतजामों पर जोर दिया गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सुबह और शाम के समय अकेले जंगल की ओर न जाएं, बल्कि समूह में ही यात्रा करें। जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भालुओं से बचाव के प्रभावी तरीके बताए जाएंगे। साथ ही, आबादी वाले क्षेत्रों और रास्तों पर कूड़ा न फेंकने, रात में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करने, सोलर लाइट लगाने और मजबूत बाड़ बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गौशालाओं, शौचालयों और घरों के आसपास, विशेषकर शीतकाल में, झाड़ियों की नियमित सफाई को अनिवार्य बताया गया है।
भालुओं की गतिविधियों वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए कैमरा ट्रैप, पगमार्क अध्ययन और आवश्यकता पड़ने पर ड्रोन सर्वे जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्विक रिस्पांस टीम) और फील्ड स्टाफ द्वारा पैदल गश्त बढ़ाई जाएगी। वायरलेस, मोबाइल अलर्ट और व्हाट्सएप समूहों को सक्रिय रखने पर भी बल दिया गया है। अधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है यदि भालू अपने शावकों के साथ दिखाई दें।
किसी भी घटना की सूचना मिलते ही, उसमें जीपीएस लोकेशन, समय और भालू के व्यवहार का विस्तृत विवरण शामिल करते हुए एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। वन कर्मियों की टीम को तुरंत घटनास्थल पर भेजा जाएगा, जिनके पास ट्रेंक्यूलाइजिंग किट, सुरक्षात्मक उपकरण, बचाव जाल, प्राथमिक उपचार किट और संचार उपकरण जैसे आवश्यक संसाधन होंगे। भीड़ को नियंत्रित करना, भालू की स्थिति का आकलन करना और आवश्यकतानुसार सुरक्षित बचाव अभियान चलाना अनिवार्य होगा। घायल व्यक्तियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने और अनुग्रह राशि की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, भालुओं को उनके प्राकृतिक आवास में भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ओक, काफल और जंगली बेरी जैसे खाद्य पौधों के रोपण और संरक्षण पर जोर दिया गया है। जिन क्षेत्रों में भालुओं का घनत्व अधिक है, वहां उनके आवास स्थलों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
