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बिजनौर में गंगा सफारी में बड़ा बदलाव, डीजल बोट की जगह इलेक्ट्रिक बोट से लौटे डॉल्फिन

By Nov 20, 2025

बिजनौर में गंगा नदी पर संचालित होने वाली ‘गंगा सफारी’ में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव देखा गया है। कुछ समय पहले तक डीजल इंजन वाली मोटर बोटों के शोर और प्रदूषण के कारण गंगा की डॉल्फिनें बैराज घाट से दूर चली गई थीं। पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक इंजन वाली नौकाओं का संचालन शुरू किया है। इस परिवर्तन के सुखद परिणाम सामने आए हैं, और अब डॉल्फिनें फिर से गंगा के बैराज घाटों पर दिखने लगी हैं, जो स्थानीय पर्यटन के लिए एक बड़ा आकर्षण साबित हो रहा है।

गंगा नदी बिजनौर जिले में लगभग 115 किलोमीटर का सफर तय करती है और यह क्षेत्र डॉल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे विभिन्न जलीय जीवों का घर है। वर्ष 2020 में, गंगा को पर्यटन से जोड़ने के उद्देश्य से ‘गंगेज सफारी’ की शुरुआत की गई थी, जिसके लिए चार डीजल इंजन वाली मोटर बोटें चलाई गईं। हालांकि, इन बोटों के चलने से उत्पन्न होने वाले शोर, कंपन और डीजल की गंध के कारण डॉल्फिनें धीरे-धीरे तट से दूर होने लगीं।

पिछले वर्ष हैदरपुर वेटलैंड में आए पक्षी प्रेमियों ने इस समस्या को उजागर किया। उन्होंने देखा कि मोटर बोटों की वजह से डॉल्फिनें घाटों के पास नहीं आ रही हैं। स्थानीय दुकानदारों से भी इस बात की पुष्टि हुई। इसके बाद, प्रकृति प्रेमियों के सुझाव पर, मोटर बोटों में लगे डीजल इंजनों को हटाकर इलेक्ट्रिक इंजन लगाए गए। इस बदलाव का खर्च भी प्रकृति प्रेमियों द्वारा ही वहन किया गया।

सात से आठ महीनों के भीतर ही इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे। डॉल्फिनें न केवल वापस बैराज घाटों पर लौटने लगी हैं, बल्कि अब वे खुले तौर पर पानी में अठखेलियां करती हुई देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, धारा में बने टापुओं पर घड़ियालों का दिखना भी अब आम हो गया है।

जिला क्रीड़ा अधिकारी, जो इस परियोजना के नोडल अधिकारी भी हैं, राजकुमार ने बताया, “गंगा में डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक बोट चलाने के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। अब डॉल्फिन फिर से गंगा के तट बैराज घाट तक आ रही हैं। प्रकृति प्रेमियों के सुझाव पर यह परिवर्तन किया गया जो सफल रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से न केवल जलीय जीवों को सुरक्षा मिली है, बल्कि यह गंगा सफारी को पर्यावरण के अनुकूल बनाकर पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी, जिससे स्थानीय पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

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