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नीतीश कुमार: बिहार की राजनीति में एक अद्वितीय नेता, सत्ता विरोधी लहर को मात देने की कला

By Nov 19, 2025

बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कई सवाल उठ रहे हैं। क्या नीतीश कुमार, जो लगभग दो दशकों से सत्ता में हैं, सत्ता विरोधी लहर को मात देने में सफल रहे हैं? सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की सफलता का एक बड़ा कारण भाजपा के साथ उनका गठबंधन रहा है। वहीं, लालू प्रसाद यादव की राजनीति के कारण राजद का जनाधार लगातार घटता गया।

लालू यादव की छवि को तब गहरा आघात लगा, जब उन्होंने चारा घोटाले में फंसने के बाद अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री पद सौंपा, जबकि उनका कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था। इसके विपरीत, नीतीश कुमार की छवि हमेशा से ही साफ-सुथरी रही है। उन पर कभी भी भ्रष्टाचार या भाई-भतीजावाद के आरोप नहीं लगे।

एक समय था जब लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान जैसे नेता एक साथ जनता दल में थे। 1989 और 1990 के चुनावों में दोनों ने मिलकर काम किया, लेकिन बाद में दोनों की राहें अलग हो गईं। 1994 में जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में समता पार्टी का गठन हुआ, लेकिन लालू यादव का करिश्मा कम नहीं हुआ। हालांकि, नीतीश कुमार ने हार नहीं मानी और राजग के गठन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

सूत्रों के अनुसार, 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। यह दर्शाता है कि दोनों नेताओं ने अपनी राजनीति को अलग-अलग दिशा दी। 2000 तक आते-आते लालू यादव पिछड़ों के नेता बनकर रह गए, जबकि नीतीश कुमार अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में कामयाब रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार की सफलता का राज उनकी साफ छवि, विकास कार्यों पर ध्यान और गठबंधन की राजनीति में है। हालांकि, उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्हें बिहार में विकास की गति को बनाए रखना होगा और जनता का विश्वास भी जीतना होगा।

यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार आने वाले समय में बिहार की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक कौशल निश्चित रूप से बिहार के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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