बवासीर के लक्षण कहीं बाउल कैंसर का संकेत तो नहीं? जानें बचाव और सावधानियां
बदलती जीवनशैली, खानपान की गलत आदतें और तनाव बवासीर के मामलों को बढ़ा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, पाइल्स (बवासीर) के कुछ लक्षण बाउल कैंसर के समान हो सकते हैं, जिससे मरीज़ अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। मल में खून आना, पेट दर्द, वजन घटना, मल त्याग की आदतों में बदलाव और थकान जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
सूत्रों के अनुसार, सरकारी और निजी अस्पतालों में पाइल्स के मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई मरीज़ झिझक के कारण डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज़ों में, जो पाइल्स के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करते हैं, उनमें बाउल कैंसर की संभावना अधिक होती है। ऐसे मामलों में, कैंसर अक्सर तीसरे या चौथे चरण तक पहुँच जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाइल्स के इलाज के लिए कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनमें ओपन सर्जरी, लेजर और लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं शामिल हैं। नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी पीना और उच्च फाइबर युक्त भोजन पाइल्स से बचाव में मदद कर सकता है। जंक फूड और बाहर का तला-भुना खाना पाइल्स के प्रमुख कारण हैं, जिनसे बचना चाहिए।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पाइल्स एक गंभीर रोग हो सकता है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह आनुवंशिकता, मोटापे, लंबी यात्रा या लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतों के कारण भी हो सकता है। कई मरीज़ झिझक के कारण नीम-हकीमों से इलाज करवाते हैं, जिससे गुदा मार्ग संकरा हो जाता है और बाद में सर्जरी जटिल हो जाती है। इलाज में देरी से लगातार रक्तस्राव के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी भी हो सकती है।
पाइल्स के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्वयं इलाज करने से बचें। समय पर निदान से कैंसर जैसे गंभीर जोखिमों से बचा जा सकता है। स्वस्थ खानपान, व्यायाम और फाइबर युक्त आहार पाइल्स को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
