प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान: अगले 5 साल बिहार पर फोकस, कंसल्टेंसी से किनारा
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अगले पांच वर्षों के लिए अपनी योजनाओं का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, किशोर अब किसी भी कंसल्टेंसी कार्य में शामिल नहीं होंगे और उनका पूरा ध्यान बिहार पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य के विकास और उत्थान के लिए काम करेंगे और इस दौरान किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं रहेंगे।
प्रशांत किशोर ने एक साक्षात्कार में बताया कि वे अगले पांच वर्षों तक बिहार में जमीनी स्तर पर काम करेंगे। उन्होंने कहा, “बिहार जीतने तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा, चाहे इसमें पांच साल लगें या दस साल भी। मैं अपने फंडामेंटल्स नहीं बदलूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि वे ऑपरेशनल और टैक्टिकल बदलावों का समर्थन करेंगे, लेकिन माफिया नेताओं को अपनी पार्टी के लिए कभी लड़ने नहीं देंगे।
किशोर के ‘माफिया नेताओं’ के उल्लेख को राजद पर एक तंज के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ऐसी उम्मीद थी कि 2025 के चुनाव में राजद, बीजेपी और जदयू को चुनौती देगी, लेकिन वह जंगल राज के दाग से उबर नहीं पाई और केवल 25 सीटें जीतने में सफल रही।
प्रशांत किशोर ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार को जीत दिलाने में मदद की थी। इसके बाद, उन्होंने 2021 में बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल को बड़ी जीत दिलाई थी। उन्होंने कहा, “मैं जो कर रहा हूं, उसे जारी नहीं रखना चाहता। मैंने बहुत कुछ कर लिया है। अब मेरे लिए ब्रेक लेने का समय है…”।
उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपने छोटे से कार्यकाल का भी जिक्र किया और कहा कि “मैं एक नाकाम पॉलिटिशियन हूं।” सूत्रों के अनुसार, बिहार चुनाव में जन सुराज की हार पर उन्होंने कहा, “मैं ठीक से सो नहीं पा रहा हूं…”। प्रशांत किशोर के इस फैसले को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे बिहार के लिए क्या नया करते हैं और राज्य के विकास में कितना योगदान देते हैं।
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