खगड़िया में बागमती का कहर: 50 साल बाद बदली धारा, कटाव से खतरे में गांव
खगड़िया, बिहार: खगड़िया नदी-पानी का जिला है, और यहां कब कौन नदी किस करवट मुड़ जाए, कहना मुश्किल है। सूत्रों के अनुसार, जिले में बागमती नदी ने पिछले 50 वर्षों में अपनी धारा बदल दी है, जिससे इलाके में व्यापक कटाव हो रहा है। इस बदलाव के कारण स्थानीय लोगों के घर और खेत खतरे में आ गए हैं, जिससे वे चिंतित हैं।
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-दो, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने बताया कि 50 वर्ष के बाद बागमती ने यहां धारा बदली है। नदी विशेषज्ञ ब्रजभूषण झा के अनुसार, वर्ष 2008 के आसपास बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा उत्तर माड़र पंचायत के सिमराहा के समीप बागमती पर पूरब से उत्तर दिशा में एक चैनल बनाया गया, जिससे नदी की धारा अवरुद्ध हो गई और अब यह अपनी पुरानी धारा में शिफ्ट हो रही है, जिससे कटाव हो रहा है।
अगहन के महीने में हो रहे इस भीषण कटाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 30 एकड़ से अधिक खेती की भूमि बागमती में समा गई है। किसान उग्र नारायण यादव ने बताया कि 15 दिनों से कटाव जारी है और उनकी सात बीघा जमीन नदी में समा गई है। स्थानीय जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सुनील चौरसिया ने भी बताया कि कई अन्य किसानों की जमीन भी नदी में जा चुकी है।
कटाव करते-करते नदी प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल माइजीथान (बड़ी कात्यायनी मंदिर) के पास पहुंच चुकी है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण माइजीथान को बचाने के लिए मंदिर परिसर से बाहर बागमती के तट पर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-दो, खगड़िया की ओर से यहां पांच दिनों से फ्लड फाइटिंग का कार्य जारी है, लेकिन कटाव पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है। प्रभारी पदाधिकारी जिला आपदा शाखा खगड़िया, कौशिकी कश्यप ने बताया कि कटाव पर नियंत्रण को लेकर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मनीष कुमार ने कहा कि नदी धारा ही बदल चुकी है और माइजीथान को बचाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। कौशिकी कश्यप ने कहा कि यहां 24 घंटे फ्लड फाइटिंग का कार्य जारी है।
