फर्जी टीईटी और शैक्षिक प्रमाणपत्रों से शिक्षक बने दो शिक्षकों पर धोखाधड़ी का मुकदमा
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में फर्जी शिक्षकों का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां दो शिक्षकों ने टीईटी और शैक्षिक प्रमाणपत्रों में हेरफेर कर सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल की थी। सिसवा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हरखपुरा में तैनात सहायक अध्यापक आनंद कुमार पांडेय और कंपोजिट विद्यालय हेवती में तैनात सहायक अध्यापक शुभचंद्र यादव के खिलाफ कोठीभार पुलिस ने धोखाधड़ी और कूटरचना का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों शिक्षकों के टीईटी और शैक्षिक प्रमाणपत्रों के फर्जी पाए जाने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त करने और मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई की।
जानकारी के मुताबिक, आनंद कुमार पांडेय की नियुक्ति वर्ष 2016 में हुई थी और बाद में उनका स्थानांतरण प्राथमिक विद्यालय हरखपुरा में हुआ था। उनकी तैनाती के दौरान एक शिकायत मिलने पर जब दस्तावेजों की जांच कराई गई, तो उनका टीईटी 2013 का प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया। इसके तुरंत बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
इसी तरह, कंपोजिट विद्यालय हेवती में तैनात सहायक अध्यापक शुभचंद्र यादव के विरुद्ध भी जांच उच्चाधिकारियों के आदेश पर कराई गई। सत्यापन में उनका टीईटी 2015 का प्रमाणपत्र कूटरचित पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद उनकी नियुक्ति भी तत्काल निरस्त कर दी गई और उन्हें बर्खास्त किया गया।
कोठीभार थानाध्यक्ष ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर दोनों आरोपित शिक्षकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी और कूटरचना से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फिलहाल सभी संबंधित दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
