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कानपुर एलीवेटेड रोड परियोजना: लापरवाही की भेंट चढ़ा विकास, 600 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

By Nov 16, 2025

कानपुर की महत्वाकांक्षी 10.2 किलोमीटर लंबी एलीवेटेड रोड परियोजना, जो गोल चौराहे से रामादेवी चौराहे तक बननी है, व्यवस्था की कमजोरी का आईना बन गई है। कंपनी की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के चलते यह परियोजना न केवल 15 माह पीछे खिसक गई है, बल्कि इसकी अनुमानित लागत 900 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिससे राजकोष पर 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। यह देरी परियोजना की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

इस डेढ़ हजार करोड़ रुपये की परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया में ही भारी अनियमितता देखने को मिली है। सूत्रों के अनुसार, पिछले 21 माह में डीपीआर को 20 बार संशोधित किया गया है, लेकिन अभी तक इसे अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई है। हेक्सा नामक परामर्शदाता कंपनी को नवंबर 2024 तक डीपीआर सौंपना था, लेकिन विभागीय इंजीनियरों और कंपनी की लगातार लापरवाही तथा संशोधनों के चलते यह योजना 15 माह पीछे धकेल दी गई। 500 पन्नों की संशोधित डीपीआर अब जाकर लखनऊ मुख्यालय पहुंची है, जहाँ से इसे जल्द ही मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजे जाने का दावा किया जा रहा है।

डीपीआर में बार-बार संशोधन का मुख्य कारण अलाइनमेंट, रैंप डिजाइन और यातायात विश्लेषण में तकनीकी खामियां थीं। सबसे अधिक बदलाव झकरकटी बस अड्डे, जरीब चौकी और सीओडी क्रॉसिंग पर बनने वाले रैंपों को लेकर हुए। कभी रैंप की ऊंचाई अनुपयुक्त पाई गई, तो कभी मोड़ तकनीकी रूप से असुरक्षित मिले। इसके अतिरिक्त, शहर में बढ़ते जाम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नए विकल्प तलाशने पड़े, जिनमें काफी समय बर्बाद हुआ।

फरवरी में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के कानपुर दौरे के दौरान, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने डीपीआर में हो रही देरी की शिकायत की थी। केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली पहुंचकर एक ऑनलाइन बैठक के माध्यम से कंसल्टेंट कंपनी को कड़े निर्देश दिए थे और 31 मार्च 2025 की समयसीमा तय की थी। हालांकि, कंपनी इस समयसीमा का भी पालन करने में विफल रही और सुधारों का सिलसिला उसके बाद भी जारी रहा। इस लगातार देरी का सीधा परिणाम परियोजना के बजट में 600 करोड़ रुपये की वृद्धि के रूप में सामने आया है।

फिलहाल, इस महत्वपूर्ण परियोजना का भविष्य अधर में लटका है। अब यह देखना होगा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने और बढ़ी हुई लागत को समायोजित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं ताकि कानपुर के लोगों को इस एलीवेटेड रोड का लाभ मिल सके और जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो।

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