बिहार विधानसभा चुनाव 2025: सीमांचल में ओवैसी का जादू या महागठबंधन-NDA की वापसी?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम का दिन है और राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। खासकर सीमांचल क्षेत्र में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जहां असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। AIMIM ने कुल 25 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से 15 सीटें अकेले सीमांचल क्षेत्र में हैं।
चुनाव से पहले, जब AIMIM प्रमुख ओवैसी ने महागठबंधन से हाथ मिलाने का ऑफर दिया था, तो उसे ठुकरा दिया गया था। इसके बाद, AIMIM ने चंद्रशेखर की आजाद पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ मिलकर एक ग्रैंड डेमोक्रेटिक गठबंधन (GDA) बनाया और चुनावी मैदान में उतरी। आज परिणाम के रुझान आने शुरू हो गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सीमांचल की जनता ने ओवैसी के ‘जादू’ पर भरोसा जताया है या फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन एक बार फिर इस क्षेत्र में अपनी वापसी कर रहे हैं।
AIMIM ने सीमांचल और अन्य क्षेत्रों की कई महत्वपूर्ण सीटों पर अपने दिग्गज उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। अमौर विधानसभा सीट से अख्तरुल इमान, बलरामपुर सीट से अदिल हसन, ढाका से राणा रणजीत सिंह, नरकटिया से एस हक, बहादुरगंज से तौसीफ आलम और किशनगंज से वकील शम्स आगाज जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अमौर में अख्तरुल इमान का मुकाबला जेडीयू के सबा जफर और कांग्रेस के अब्दुल जलील मस्तान से है। बलरामपुर में आदिल हसन की सीधी टक्कर सीपीआई माले के महबूब आलम से मानी जा रही है। वहीं, ढाका सीट पर राणा रणजीत सिंह बीजेपी के पवन कुमार जायसवाल और बीएसपी के सिकंदर भारती के सामने हैं। नरकटिया में शमीमुल हक का मुकाबला आरजेडी के शमीम अहमद और जदयू के विशाल कुमार से है।
इन सीटों पर AIMIM की दावेदारी ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओवैसी की पार्टी बिहार में अपनी पैठ बना पाएगी और सीमांचल के राजनीतिक परिदृश्य को बदल पाएगी, या फिर स्थापित दल अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब होंगे। आज के परिणाम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे।
