शरद पूर्णिमा पर भद्रा और पंचक का साया, जानिए खीर रखने और पूजा का सही समय | religion news
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस साल 25 अक्टूबर 2026 को यह पर्व मनाया जाएगा, जिस दौरान भद्रा और पंचक का साया भी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं के साथ आकाश में विराजमान होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है।
पंचांग के मुताबिक, 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे से रात 10:52 बजे तक भद्रा काल रहेगा, जबकि पंचक सुबह 6:28 बजे से शाम 7:22 बजे तक रहेगा। हालांकि, भद्रा और पंचक के बावजूद शरद पूर्णिमा के मुख्य अनुष्ठान और रात्रि जागरण पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश धार्मिक कृत्य और खीर रखने का समय इसके बाद शुरू होता है।
चांदनी रात में खीर रखने के लिए निशिता काल को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस साल खीर रखने का शुभ मुहूर्त रात 11:40 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक तय किया गया है। इस दौरान दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, ताकि उसमें औषधीय और अमृत तुल्य गुण आ सकें। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्यता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कोजागरी पूर्णिमा के रूप में प्रसिद्ध इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। रात्रि जागरण और विधि-विधान से माता की पूजा करने से भक्तों के जीवन में आर्थिक संपन्नता आती है। जानकारों का कहना है कि स्थानीय पंचांग और समयानुसार चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के जानकारों या पंचांग की मदद से सही समय की पुष्टि अवश्य कर लें।
