उरई: प्रधानाध्यापक की हैवानियत, 8 साल के बच्चे को पीटकर शौचालय में किया बंद
उत्तर प्रदेश के उरई से शिक्षा के मंदिर में क्रूरता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। यहाँ एक प्रधानाध्यापक ने मामूली बात पर हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए कक्षा तीन के 8 वर्षीय छात्र को बेरहमी से पीटा और फिर दो घंटे तक शौचालय में कैद कर दिया। इस घटना ने शिक्षा प्रणाली में संवेदनशीलता की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
जागरण संवाददाता, उरई के अनुसार, यह घटना गुरुवार को हुई। उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राम औतार राठौर, जो अपने तैनाती वाले स्कूल नहीं जाकर घर पर ही सुरभि पब्लिक स्कूल नाम से एक निजी विद्यालय संचालित करते हैं, ने सुबह 9:40 बजे एक बच्चे को निर्ममता से पीटा। बताया गया है कि बच्चा अपने सहपाठियों के साथ खेल रहा था और इसी दौरान उनका झगड़ा हो गया। बच्चों ने इसकी शिकायत प्रधानाध्यापक से कर दी। गुस्से में आए प्रधानाध्यापक राम औतार ने मासूम बच्चे को घूंसे और थप्पड़ जड़ दिए, जिससे उसकी पीठ और चेहरे पर चोट के निशान उभर आए।
क्रूरता यहीं नहीं रुकी। प्रधानाध्यापक ने बच्चे को करीब दो घंटे तक शौचालय में बंद रखा। दोपहर दो बजे छुट्टी के समय बच्चे को छोड़ा गया और धमकाया गया कि वह घर पर किसी को इस घटना के बारे में न बताए। चोट के दर्द से कराहता हुआ बच्चा एक दुकान के बाहर बैठकर रोने लगा। जब शाम को बच्चा अपने समय पर घर नहीं पहुंचा, तो उसके पिता उसे खोजने निकले और रास्ते में ही वह रोता हुआ मिला। बच्चे ने अपने पिता को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पिता उसे लेकर सदर कोतवाली पहुंचे और आरोपित प्रधानाध्यापक के खिलाफ तहरीर दी।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित प्रधानाध्यापक राम औतार राठौर को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ बाल अपराध के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सीओ सिटी अर्चना सिंह ने बताया कि बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, आरोपित प्रधानाध्यापक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि ‘गलती से बच्चे को मार दिया था।’ इस बीच, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) चंद्रप्रकाश ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती असंवेदनशीलता का एक और उदाहरण है। इससे पहले भी कानपुर में पटाखे जलाने पर मासूम को पीटने और कुत्ते से कटवाने, मोबाइल चोरी के शक में किशोर को तालिबानी सजा देने, और पहाड़ा न सुनाने पर छात्र को डंडे से पीटकर जख्मी करने जैसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में शिक्षा के मंदिरों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों से सख्त से सख्त कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
