पापांकुशा एकादशी पर करें भगवान विष्णु की आराधना, मिलती है पापों से मुक्ति | religion news
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से जगत के पालनहार की पूजा करने से भक्तों के जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मानसिक शांति के साथ पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने इस एकादशी का महात्म्य बताया था। कथा में विंध्य पर्वत के एक बहेलिए का प्रसंग मिलता है, जिसने अपना पूरा जीवन हिंसा और गलत कार्यों में बिता दिया था। जीवन के अंतिम समय में जब उसे अपने पापों का भय सताया, तब वह महर्षि अंगिरा की शरण में पहुंचा। महर्षि ने उसे आश्विन शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। बहेलिए ने पूरी श्रद्धा के साथ यह उपवास किया, जिसके प्रभाव से उसके सारे पाप धुल गए और उसे विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।
यह कथा संदेश देती है कि मनुष्य से अनजाने में या जानबूझकर हुई गलतियों का अहसास होने पर यदि वह प्रायश्चित कर धर्म के मार्ग को अपना ले, तो उसका जीवन सुधर सकता है। इस पावन तिथि पर जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। रात के समय जागरण कर भगवान का स्मरण करने से साधक को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
