भारत समेत दुनिया के कई देशों में सरकारों की नीतियों के खिलाफ भड़का जनआक्रोश | international news
मौजूदा समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में व्यापक जन-असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का दौर तेजी से उभर रहा है। भारत से लेकर यूरोप और अमेरिकी महाद्वीप तक, आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और आवास संकट जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर मुखर हो चुके हैं। इन प्रदर्शनों ने वैश्विक स्तर पर सरकारों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूरोपीय देशों में बिगड़ते आर्थिक हालात और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर युवा वर्ग सबसे आगे नजर आ रहा है। फ्रांस में बढ़ती महंगाई, ईंधन के बढ़े दामों और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर चुके हैं। इसी तरह बेल्जियम और अल्बानिया में विश्वविद्यालयों की फीस वृद्धि तथा बदहाल व्यवस्था के विरोध में छात्रों का गुस्सा फूटा है, जहां पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। पुर्तगाल और इटली में भी स्थिर वेतन और आसमान छूती संपत्ति की कीमतों के खिलाफ नागरिकों ने आक्रोश व्यक्त किया है।
लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना में बजट कटौती और शिक्षा नीति को लेकर तीव्र संघर्ष देखने को मिल रहा है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में राजनीतिक नीतियों के विरोध में रैलियों का सिलसिला जारी है। वहीं भारत में भी विभिन्न प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों को लेकर विरोध के स्वर गूंज रहे हैं। दुनिया भर में सुलगती इन विरोध की आग का सीधा असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ रहा है, जिससे सरकारों को अपनी आर्थिक और सामाजिक नीतियों की समीक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
