दिल्ली कोर्ट ने 2018 में पत्नी को गोली मारने के मामले में पति को ठहराया दोषी | delhi court conviction
दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 में कनॉट प्लेस स्थित एक अस्पताल के बाहर अपनी पत्नी पर गोली चलाकर उसकी हत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को दोषी करार दिया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पीड़िता की गवाही बेहद विश्वसनीय थी, जो आरोपी के खिलाफ अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त है। इस फैसले से घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय की उम्मीद को बल मिला है।
घटनाक्रम के अनुसार, यह वारदात 24 नवंबर 2018 को कनॉट प्लेस के एक अस्पताल के बाहर हुई थी। पीड़िता वहां बतौर सिक्योरिटी गार्ड काम करती थी और अपने पति के जेल जाने के बाद से मायके में रह रही थी। आरोपी पति घटना से डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आया था। शाम के वक्त उसने पीड़िता को अस्पताल के बाहर बुलाया और ऑटो-रिक्शा में बैठने के बाद ससुराल लौटने का दबाव बनाया। महिला द्वारा इंकार किए जाने पर उसने उस पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत पेश किए। ऑटो-रिक्शा मालिक ने गवाही दी कि उसने वह वाहन आरोपी को दिया था, जो बाद में घटनास्थल के पास खून के धब्बों के साथ लावारिस मिला था। फोरेंसिक जांच में गाड़ी से मिले खून के नमूनों का मिलान पीड़िता के डीएनए से हो गया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी घायल गवाह की गवाही अभियोजन पक्ष के लिए बेहद मजबूत आधार होती है, क्योंकि इससे उसकी घटनास्थल पर मौजूदगी स्वतः सिद्ध हो जाती है। अंततः अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना।
