घाटशिला उपचुनाव: मतदान के बाद सोमेश कार्यकर्ताओं संग, बाबूलाल खेतों में व्यस्त
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में मंगलवार को मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हो गई, जिसके बाद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने कुछ राहत की सांस ली है। हालांकि, मतगणना के परिणाम आने तक जीत-हार की बेचैनी बनी हुई है। बुधवार को, मतदान के अगले दिन, दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी अपनी-अपनी रणनीतियों में व्यस्त दिखे।
झामुमो के प्रत्याशी सोमेश सोरेन ने मतदान समाप्त होने के बाद बुधवार को थोड़ा विश्राम किया। सुबह वे जमशेदपुर गए और फिर घाटशिला में पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ बूथों के मतदान प्रतिशत पर गहन चर्चा की और मतगणना पर भी विचार-विमर्श किया। सोमेश चंद्र सोरेन ने विश्वास जताते हुए कहा, “हमें जनता का भरपूर आशीर्वाद मिला है और कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत से हम उत्साहित हैं। इस बार हमें एक लाख से ज्यादा मत मिलने की उम्मीद है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उन्हें मौका मिलता है, तो वे अपने पिता द्वारा छोड़े गए अधूरे कार्यों को पूरा करेंगे, जिनमें मुसाबनी में इंजीनियरिंग कॉलेज, हेंदलजुड़ी में जनजातीय विश्वविद्यालय का निर्माण, और फुलडुंगरी से झांटीझरना सड़क का निर्माण शामिल है।
दूसरी ओर, भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन ने मतदान के बाद आराम करने के साथ-साथ अपने खेतों में समय बिताया। कृषि कार्य में उनकी गहरी रुचि है, और चुनाव प्रचार के कारण वे अपनी खेती में समय नहीं दे पाए थे। बुधवार को उन्होंने अपने खेत में धान की फसल की कटाई की। इसके बाद वे क्षेत्र भ्रमण पर निकल पड़े और जादूगोड़ा अस्पताल चौक पर अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने मतदान की प्रक्रिया पर चर्चा की और बूथवार आंकड़ों पर विचार किया।
दोनों ही प्रमुख दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। झामुमो ने कहा है कि घाटशिला में हेमंत सरकार की नीतियों पर मुहर लगी है, जबकि भाजपा का दावा है कि परिणाम चौंकाने वाले होंगे। इस उपचुनाव में झामुमो-भाजपा समेत कुल 13 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है, और लगभग 74.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो क्षेत्र में मतदाताओं के उत्साह को दर्शाता है। अब सभी को 28 जून को होने वाली मतगणना का इंतजार है, जो घाटशिला के अगले विधायक का फैसला करेगी।
