आगरा में डीजीपी का पीआरओ बनकर बेरोजगारों से ठगे सवा करोड़ रुपये, आरोपी गिरफ्तार | agra news
आगरा के साइबर क्राइम थाने में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां खुद को डीजीपी के पीआरओ का मित्र बताने वाले एक ठग ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। एकता थाना क्षेत्र के रौनक एन्क्लेव निवासी वीरू शर्मा नामक आरोपी ने इस ठगी को अंजाम दिया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और युवा कल्याण सहित कई प्रमुख विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर आठ बेरोजगारों से कुल सवा करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी थी। इस तरह के जालसाजी के मामलों से युवाओं का सिस्टम से भरोसा उठता है और यह सीधे तौर पर प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक स्थानीय शिक्षिका के पति अरविंद सक्सेना ने साइबर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। बीएलओ ड्यूटी के दौरान आरोपी की मुलाकात शिक्षिका से हुई थी। इसके बाद उसने पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर तेरह लाख से अधिक रुपये ले लिए। विश्वास जीतने के लिए उसने एक अन्य व्यक्ति से डीजीपी के पीआरओ के रूप में फोन पर बात भी कराई थी। रकम ऐंठने के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर फर्जी परिणाम और ज्वाइनिंग लेटर भेज दिए थे, जो बाद में आधिकारिक वेबसाइट पर जांचने पर पूरी तरह फर्जी साबित हुए।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि केवल एक ही व्यक्ति नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सचिवालय, मेट्रो और बेसिक शिक्षा कार्यालय जैसे विभिन्न विभागों में नौकरी के नाम पर कई युवाओं को ठगा गया है। बारहवीं पास आरोपी बेहद शातिर तरीके से पहले लोगों का भरोसा जीतता था और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें झांसे में लेता था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कूटरचित प्रपत्र तैयार करने और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उसे सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही है ताकि ठगी के इस नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
