संसद से बाहर हुआ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का परिवार, 37 साल बाद टूटा सियासी सिलसिला | india politics
भारतीय राजनीति में ‘युवा तुर्क’ के रूप में अपनी खास पहचान बनाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के परिवार का प्रतिनिधित्व अब देश की संसद में नहीं रहेगा। पिछले 37 वर्षों से लगातार संसद के किसी न किसी सदन में इस परिवार की मौजूदगी बनी हुई थी, जो अब समाप्त हो गई है। चंद्रशेखर के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को संभाल रहे उनके बेटे नीरज शेखर को इस बार उच्च सदन के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया गया है, जिससे इस सियासी सफर पर विराम लग गया है।
नीरज शेखर वर्ष 2019 में समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें उच्च सदन में भेजकर जिम्मेदारी दी थी, लेकिन हालिया राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के तहत पार्टी ने नए चेहरों को मौका देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, पिछले चुनावों में अपेक्षित चुनावी लाभ न मिलने और क्षेत्र में घटते प्रभाव को भी इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ेगा। एक तरफ जहां यह परिवार के समर्थकों के लिए बड़ा झटका है, वहीं दूसरी तरफ यह मुख्यधारा की राजनीति में नए नेतृत्व के उभार का संकेत भी देता है। परिवार के संसद से बाहर होने से बलिया और पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरणों के उभरने की संभावना है।
