फ्लाई दुबई के विमान में आपात स्थिति पर इजरायल ने क्यों भेजे थे लड़ाकू विमान? | international news
फ्लाई दुबई की एक उड़ान के दौरान अचानक उत्पन्न हुई आपातकालीन स्थिति ने इजरायली सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया। उड़ान के दौरान विमान से मिलने वाले संकेतों और स्पष्ट जानकारी के अभाव में इजरायली सेना ने संभावित हाईजैकिंग की आशंका को भांपते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय हवाई सुरक्षा के उन कड़े नियमों की याद दिला दी है, जो किसी भी असामान्य स्थिति में देशों को तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य करते हैं।
बुधवार की सुबह फ्लाई दुबई के विमान से पहले सामान्य आपात स्थिति का कोड और उसके कुछ ही मिनटों बाद विमान के अपहरण से जुड़ा ट्रांसपोंडर कोड एक्टिव हुआ। इन संकेतों के मिलते ही इजरायली वायु सेना ने बिना देर किए अपने दो फाइटर जेट्स को आसमान में भेज दिया। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य हवा में ही स्थिति का जायजा लेना, विमान पर कड़ी निगरानी रखना और उसे सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट करना था। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, जब भी कोई विमान अपने तय मार्ग से भटकता है या संकटकालीन कोड भेजता है, तो देश की वायु सेना इसी तरह की त्वरित प्रक्रिया अपनाती है।
ऐसी गंभीर परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों की तैनाती का मुख्य मकसद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी बड़े खतरे को जमीन पर उतरने से पहले रोकना होता है। वर्ष 2001 की घटनाओं के बाद से दुनिया भर के देश हवाई सुरक्षा को लेकर बेहद चौकस रहते हैं। फाइटर जेट्स का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि यदि विमान पर किसी असामाजिक तत्व का कब्जा हो चुका है, तो उसे रिहायशी इलाकों या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इमारतों से टकराने से रोका जा सके। नागरिक विमान को हवा में गिराने का फैसला देश के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा सलाहकारों द्वारा लिया जाने वाला सबसे अंतिम और अत्यंत दुर्लभ विकल्प होता है। गनीमत यह रही कि इस मामले में विमान ने सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग कर ली, जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी टल गई।
