महज पांच साल में पांच लाख से तीस लाख हुआ पैकेज, नौकरी बदलने के ट्रेंड पर छिड़ी बड़ी बहस | business news
आज के कॉर्पोरेट युग में ‘नौकरी बदलते रहो, पैकेज बढ़ता रहेगा’ का मंत्र तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल की सफलता की कहानी सामने आने के बाद यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि क्या बार-बार जॉब स्विच करना हर किसी के लिए फायदेमंद है। [business news] इस महिला ने महज पांच वर्षों में चार बार नौकरियां बदलकर अपना सालाना पैकेज पांच लाख रुपये से बढ़ाकर तीस लाख रुपये तक पहुंचा लिया, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
विशेष रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा समय में अधिकांश कर्मचारी बेहतर वेतन वृद्धि और करियर में आगे बढ़ने की चाह में नौकरी बदलने को प्राथमिकता दे रहे हैं। कंपनियों के आंतरिक अप्रेजल में मिलने वाली पांच से दस फीसदी की मामूली बढ़ोतरी के मुकाबले, बाहर स्विच करने पर बीस से तीस फीसदी तक का हाइक आसानी से मिल जाता है। यही कारण है कि भारी संख्या में प्रोफेशनल्स नई संभावनाओं की तलाश में रहते हैं और पब्लिक इम्पैक्ट के तौर पर यह ट्रेंड अब रिक्रूटमेंट मार्केट को भी प्रभावित कर रहा है।
हालांकि, मानव संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पैसों के पीछे भागना और हर साल कंपनी बदलना सीवी को कमजोर कर सकता है। कई बड़ी कंपनियों में शॉर्ट स्टिंट्स यानी कम समय तक टिकने वाले उम्मीदवारों को लेकर सख्त नीतियां होती हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि वेतन वृद्धि के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट और कार्यकुशलता को बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है, अन्यथा लंबी अवधि में करियर की रफ्तार थम सकती है।
