संसाधनों के अभाव में बांस से अभ्यास कर सरनाम सिंह ने जीता था स्वर्ण, ऐसा रहा एथलीट का सफर | agra news
आगरा के ग्रामीण अंचल से ताल्लुक रखने वाले एथलीट सरनाम सिंह ने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर देश के लिए जो मुकाम हासिल किया, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। जब खेल के लिए बुनियादी संसाधन और पेशेवर उपकरण उपलब्ध नहीं थे, तब उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर सफलता की इबारत लिखी [agra news].
स्कूली शिक्षा के दौरान भाला फेंक खेल के प्रति उनका आकर्षण शुरू हुआ था, लेकिन स्कूल में अभ्यास के लिए मानक भाला नहीं था। इस बाधा ने उनके हौंसले को तोड़ने के बजाय और मजबूत किया। उन्होंने बांस को ही भाला मानकर लगातार अभ्यास करना शुरू किया। उनकी यह मेहनत रंग लाई और आगे चलकर वे सेना में भर्ती हुए। सेना के कड़े अनुशासन और व्यस्तता के बीच भी उन्होंने अपने अभ्यास को कभी नहीं छोड़ा और रोजाना कई घंटे पसीना बहाया।
वर्ष 1984 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अगले ही वर्ष 1985 में उन्होंने पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए 78.38 मीटर तक भाला फेंका और नया रिकॉर्ड स्थापित किया। सिपाही से लेकर कैप्टन तक का सैन्य सफर तय करने वाले सरनाम सिंह वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त होकर अब अपने पैतृक गांव में सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस प्रकार की प्रेरणादायक खेल गाथाएं नई पीढ़ी को अभावों से ऊपर उठकर कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करती हैं।
