भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों के डूबे दो लाख करोड़ रुपये | business news
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को आए अचानक उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को हैरान कर दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन की शुरुआत तो सकारात्मक रही थी, लेकिन सत्र आगे बढ़ने के साथ ही बिकवाली का दबाव ऐसा बढ़ा कि बाजार संभल नहीं पाया। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 85 अंक फिसलकर 23,329.00 के स्तर पर सिमट गया। इस मंदी के माहौल से आम निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर पड़ा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली की मुख्य वजह विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं हैं। इसके अलावा महंगाई के आंकड़े और आयात लागत से जुड़ी चिंताएं भी निवेशकों का मनोबल कमजोर कर रही हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी थी, लेकिन उसका लाभ भी घरेलू बाजार को नहीं मिल सका। आईटी, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में हुई भारी बिकवाली ने सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया।
सेंसेक्स के डे-हाई से करीब 600 अंक टूटने के कारण बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण दो लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का रुख हावी रहा। इस मिले-जुले माहौल के बीच कोल इंडिया, इंडिगो और टाइटन जैसे चुनिंदा शेयरों में जरूर खरीदारी देखने को मिली, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए नाकाफी साबित हुई। इस तरह के उतार-चढ़ाव आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं, जिससे वित्तीय योजनाएं गड़बड़ा सकती हैं।
