अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सत्य निकेतन हादसे के बाद देश भर में हो रही कार्रवाई | india politics news
दक्षिणी दिल्ली के बहुचर्चित सत्य निकेतन इलाके में हुई पांच मंजिला इमारत ढहने की दुर्घटना ने पूरे देश का ध्यान अवैध निर्माण की तरफ खींचा है [india politics news]। इस गंभीर घटना के बाद अब देश भर के विभिन्न शहरों में अनधिकृत निर्माण कार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में उच्चतम न्यायालय में भी इस मामले को लेकर सुनवाई की गई, जहां अदालत ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रूप से यह जानना चाहा कि निर्धारित जोन के लिए बनाए गए मास्टर प्लान और नियमों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं। अदालत ने चिंता जताई कि आखिरकार रिहायशी इलाकों के भीतर धड़ल्ले से कमर्शियल गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं। इस पर सरकारी पक्ष ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अनधिकृत ढांचों को चिन्हित कर उन्हें ढहाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निकायों और पुलिस बल का पूरा सहयोग लिया जा रहा है।
बता दें कि गत 6 सितंबर को सत्य निकेतन में बेसमेंट की मरम्मत के दौरान एक पीजी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई थी, जिसमें सात बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश युवा छात्र थे जो वहां रहकर पढ़ाई कर रहे थे। इस प्रकार की त्रासदियों से आम जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा है, जिससे सबक लेते हुए प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
दूसरी ओर, इस आपराधिक लापरवाही के मुख्य आरोपी हरिराम गुप्ता की मुश्किले लगातार बढ़ती जा रही हैं। पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि भले ही आरोपी खुद को इमारत से बेकसूर बताए, लेकिन दस्तावेजों और बिजली कनेक्शन के रिकॉर्ड तथा गवाहों के ब बयानों से उसकी संलिप्तता साफ जाहिर होती है। इस सख्ती से अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।
