मृत्यु के 24 घंटे बाद क्यों लौटती है आत्मा, क्या कहता है गरुड़ पुराण | religion news
सनातन संस्कृति में जीवन और मरण के चक्र को सबसे बड़ा सत्य माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी मनुष्य के प्राण छूटते हैं, तो वह संसार के सभी भौतिक बंधनों से मुक्त हो जाता है। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद यमदूत उसे अपने साथ यमलोक ले जाते हैं, जहां उसके कर्मों का लेखा-जोखा होता है [religion news]। पापकर्म और पुण्यों के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि आत्मा को अगला लोक कौन सा मिलेगा। हालांकि, इन सब के बीच एक खास विधान का जिक्र मिलता है।
मृत्यु के ठीक 24 घंटे के भीतर जीवात्मा एक बार फिर से अपने उसी घर में लौटती है जहां उसने देहत्याग किया था। इस दौरान आत्मा अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों और सगे-सम्बन्धियों को रोते-बिलखते देखती है। परिवार के प्रति अत्यधिक मोह और लगाव के कारण आत्मा का यह सूक्ष्म शरीर करीब तेरह दिनों तक अपने प्रियजनों के आसपास ही रहता है। कई बार परिजनों को उसकी उपस्थिति का अहसास भी होता है, जिसे लोग अक्सर वहम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य परिवार को यह अहसास कराना होता है कि जीवन नश्वर है और कर्म ही सबसे बड़ा सत्य है।
आत्मा की शांति और उसकी आगे की परलोक यात्रा को सुगम बनाने के लिए तेरह दिनों तक विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं। मृतक के निमित्त पिंडदान और तर्पण का विधान है, जिससे आत्मा को तृप्ति मिलती है। मान्यता है कि इन संस्कारों से आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और वह यमलोक की कठिन यात्रा के लिए आगे बढ़ती है। यह पूरी प्रक्रिया मनुष्य को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है क्योंकि अंततः हर जीव को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है।
