शिक्षामित्रों को पुरानी पेंशन दिलाने के लिए ओपीएस शिक्षक संघर्ष समिति का गठन | up education news
उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के डायट परिसर में गुरुवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें शिक्षामित्र से शिक्षक बने शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही पेंशन की मांग को एक नई दिशा देना था, जिससे भविष्य में प्रभावित होने वाले हजारों शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। [up education news]
बैठक में सर्वसम्मति से ‘ओपीएस शिक्षक संघर्ष समिति’ का गठन किया गया, जिसमें प्रदीप उपाध्याय को अध्यक्ष चुना गया। रणनीति के तहत शिक्षामित्र के रूप में बिताई गई सेवा अवधि को वर्तमान शिक्षक सेवा में जोड़ने की मांग की जाएगी। इसके लिए राजनीतिक प्रयासों के साथ-साथ कानूनी रास्ता अपनाने का भी निर्णय लिया गया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी। अशोक शर्मा ने सुझाव दिया कि 28 मार्च 2005 से पहले के विज्ञापन के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को इस कानूनी लड़ाई में शामिल किया जाए।
प्रदीप उपाध्याय ने सभी शिक्षकों से अपने सेवा से जुड़े दस्तावेज जुटाने की अपील की है। इसके बाद प्रयागराज जाकर सेवा मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विमर्श किया जाएगा ताकि अदालत में पक्ष को मजबूती से रखा जा सके। इस पहल से प्रशासनिक स्तर पर नीतिगत बदलाव आने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों पर पड़ेगा। बैठक में रतन सिंह बघेल, ओमवीर सिंह गुर्जर और प्रेमचंद समेत कई शिक्षक उपस्थित रहे।
