लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण कंपनी पर तीन साल का प्रतिबंध, घटिया निर्माण कार्य के कारण हुई कार्रवाई | up infrastructure news
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही मिलने पर बड़ी कार्रवाई की है। एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को आगामी तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है [up infrastructure news]। इस प्रतिबंध के कारण अब यह कंपनी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई की किसी भी नई परियोजना के लिए बोली नहीं लगा सकेगी। यह फैसला आधुनिक इंजीनियरिंग के दावों के साथ बनाए गए इस मार्ग की पोल खुलने के बाद लिया गया है।
करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे का लोकार्पण इसी साल जुलाई में हुआ था। आम जनता के लिए मार्ग खुलने के महज कुछ दिनों बाद ही इसके एक बड़े हिस्से में सड़क धंसने, तारकोल उखड़ने और मिट्टी का भराव खिसकने की घटनाएं सामने आने लगीं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को बंद करना पड़ा और टोल वसूली भी रोक दी गई। सड़क मार्ग के इस तरह समय से पहले जर्जर होने से रोजाना यात्रा करने वाले आम लोगों की जान पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा था, जिससे जनता में भारी नाराजगी देखने को मिली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण ने निर्माण कंपनी के साथ-साथ निगरानी से जुड़े अधिकारियों और स्वतंत्र इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच शुरू की। शुरुआती नोटिस और जवाब-तलब के बाद यह कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है। इस तरह की प्रशासनिक सख्ती से सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों को कड़ा संदेश मिला है, जिससे भविष्य में सड़क निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और मजबूती की उम्मीद बढ़ जाती है [up infrastructure news]।
