रणबीर कपूर के राम बनने पर उठे सवाल, nitesh tiwari की रामायण पर शिव सागर की आपत्ति
भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों नितेश तिवारी के निर्देशन में बनने वाली महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ लगातार चर्चा और विवादों के घेरे में बनी हुई है। इस बीच, प्रतिष्ठित पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माता रामानंद सागर के पोते और निर्देशक शिव सागर ने फिल्म में रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में कास्ट किए जाने पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका मानना है कि ऐसे पावन और ऐतिहासिक किरदारों के लिए किसी नए चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए था, ताकि उन पर पिछली फिल्मों की किसी भी छवि का कोई दबाव या बोझ न हो।
शिव सागर का तर्क है कि रणबीर कपूर की हालिया एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘एनिमल’ में उनकी जो इमेज उभरी है, उसके बाद जनता के लिए उन्हें श्रीराम के रूप में देखना और स्वीकार करना मानसिक रूप से कठिन हो सकता है। हालांकि, उन्होंने फिल्म में यश और साई पल्लवी की कास्टिंग की सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ पिछला कोई ऐसा भारी इतिहास नहीं जुड़ा है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्टार पावर के लिहाज से बड़े नामों का होना फिल्म की मार्केटिंग और बिजनेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक पात्रों के मामले में संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
रणबीर कपूर की कास्टिंग के अलावा, फिल्म के कई अन्य पहलुओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। कलाकारों के कॉस्ट्यूम डिजाइन, वीएफएक्स क्वालिटी और कुछ ऐतिहासिक दृश्यों के चित्रण को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सांस्कृतिक संगठनों तक में असंतोष देखा जा रहा है। श्री रामलीला महासंघ ने तो मेकर्स को पत्र लिखकर फिल्म रिलीज से पहले विशेष स्क्रीनिंग की मांग तक कर डाली है, ताकि सनातन आस्था से जुड़े किसी भी पहलू पर अनजाने में ठेس न पहुंचे। साल 2023 में आई ‘आदिपुरुष’ के विवाद से सबक लेते हुए दर्शक और संगठन इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
फिल्म जगत और दर्शकों के बीच चल रही इन बहसों के बीच अंततः जनता की प्रतिक्रिया ही इस बड़े बजट के प्रोजेक्ट का भविष्य तय करेगी। ‘रामायण: पार्ट 1’ का दुनियाभर के सिनेमाघरों में आगामी 6 नवंबर 2026 को रिलीज होना तय हुआ है। मेकर्स के सामने अब चुनौती यह है कि वे इन तमाम विरोधों और आपत्तियों के बीच दर्शकों के भरोसे को कैसे जीतते हैं, क्योंकि भारतीय संस्कृति में राम केवल एक किरदार नहीं बल्कि अटूट आस्था का प्रतीक हैं।
