मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर लगे पोस्टर्स से गरमाई up politics news
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अचानक सामने आए राजनीतिक पोस्टर्स ने माहौल को गर्मा दिया है। मुजफ्फरनगर में 2013 के सांप्रदायिक दंगों की बरसी के मौके पर लगे इन विवादित होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। इन होर्डिंग पर ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ जैसे नारे लिखे होने के कारण up politics news के गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर और सहारनपुर में भी इसी तरह के पोस्टर रातों-रात चस्पा किए गए। इन होर्डिंग के लगने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, इन पोस्टर्स को लगवाने के पीछे किस संगठन या व्यक्ति का हाथ है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इसके लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी। मामला तूल पकड़ते ही पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न स्थानों से इन पोस्टर्स को हटवाना शुरू कर दिया है।
वर्ष 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ था और इस घटना के राजनीतिक दूरगामी परिणाम आज भी देखने को मिलते हैं। इस तरह के संवेदनशील मुद्दों के फिर से उभरने से सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ने की आशंका रहती है, जिससे आम जनता के बीच चिंता का माहौल बन जाता है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावों से पहले इस प्रकार के घटनाक्रम क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का काम कर सकते हैं।
प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन पोस्टर्स के पीछे किसका हाथ था और इन्हें लगाने का असल मकसद क्या था। स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि माहौल को बिगाड़ने वाले तत्वों की पहचान की जा सके।
