बढ़ते प्रदूषण से लखनऊ में सांस के मरीज परेशान, जानिये up health news की पूरी रिपोर्ट
खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हवा में घुले जहर के कारण राजधानी के अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी वार्डों में सांस के मरीजों की कतारें लंबी होने लगी हैं। इस गंभीर स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों पर पड़ रहा है जो पहले से ही हृदय या फेफड़ों की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से न केवल पुरानी बीमारियां गंभीर रूप ले रही हैं, बल्कि दिल से जुड़ी जटिलताओं का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। इस समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, कामगारों के रोजगार के दिन घट रहे हैं और आम परिवारों पर मेडिकल खर्च का भारी बोझ पड़ रहा है।
चिकित्सकों का स्पष्ट मानना है कि अस्पताल के भीतर मरीजों का इलाज दवाओं और इनहेलर के जरिए संभव है, लेकिन डॉक्टर अस्पताल के बाहर की हवा को साफ नहीं कर सकते। इसलिए व्यक्तिगत सावधानियों के साथ-साथ कचरा जलाने से बचने, अनावश्यक उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ परिवहन अपनाने जैसी आदतों को अपनाना होगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए शासन स्तर पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है। शहरी नियोजन, ऊर्जा, परिवहन, उद्योग और कचरा प्रबंधन से जुड़े विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा। साफ हवा केवल बीमारियों से बचाव का साधन नहीं है, बल्कि यह मरीज की तेज रिकवरी और स्वस्थ समाज की बुनियादी जरूरत है।
