आगरा में मोबाइल की लत और पढ़ाई के तनाव से घर छोड़ रहे बच्चे, agra news के चौंकाने वाले आंकड़े
बच्चों में लगातार बढ़ती मोबाइल की लत और अकादमिक दबाव के बीच एक बेहद संवेदनशील पहलू सामने आया है। आगरा में पिछले एक साल में 7 से 15 वर्ष की आयु के 89 बच्चों ने केवल इसलिए अपना घर छोड़ दिया क्योंकि उन्हें परिजनों ने पढ़ाई या अन्य बातों पर डांट लगाई थी। agra news के इन आंकड़ों ने अभिभावकों और मनोवैज्ञानिकों दोनों को ही चिंता में डाल दिया है।
हाल ही में सामने आए मामलों में यह बात स्पष्ट हुई है कि बच्चे स्मार्टफोन पर अत्यधिक समय बिताने और उस पर रोकटोक किए जाने पर सबसे ज्यादा आहत होते हैं। कई मामलों में वीडियो देखने से मना करने या परीक्षा के दबाव में माता-पिता के सख्त रवैये से नाराज होकर किशोर रेलवे स्टेशनों का रुख कर लेते हैं। ऐसे बच्चों का समय रहते रेस्क्यू न किया जाए तो वे किसी बड़े अपराध या दुर्घटना का शिकार भी हो सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों और रेलवे चाइल्ड लाइन की सक्रियता के कारण हालांकि समय रहते इन बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। जीआरपी और चाइल्ड लाइन के अधिकारियों द्वारा स्टेशन पर अकेले भटकते बच्चों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग की जाती है। काउंसलिंग सत्रों में बच्चों ने स्वीकार किया कि मामूली डांट-फटकार या पाबंदियों से आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया था। इसके बाद बच्चों और उनके परिजनों दोनों की संयुक्त काउंसलिंग करके उन्हें समझाइश दी जाती है।
इस बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए समाज और परिवार दोनों स्तरों पर गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के साथ दोस्ताना संवाद स्थापित करके ही इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है। परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों पर बेवजह का दबाव बनाने के बजाय उनकी भावनाओं को समझें और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए सकारात्मक तरीकों का सहारा लें।
