आगरा में 13 महीने जेल काटने के बाद निर्दोष बरी, agra crime news में सामने आया बड़ा सच
आगरा के शाहगंज इलाके में मई 2022 में हुए एक सनसनीखेज तेजाब कांड में न्याय की एक बड़ी मिसाल सामने आई है, जहां पुलिस की लापरवाही के चलते एक बेकसूर को 13 महीने तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा। इस गंभीर घटना ने स्थानीय स्तर पर नागरिकों की सुरक्षा और पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता के बीच न्याय व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
घटना के समय शाहगंज निवासी असलम की पत्नी रेशमा, बेटी इल्मा और बेटा साहिल अपने घर की छत पर सो रहे थे, तभी उन पर सोते समय तेजाब फेंक दिया गया था। शुरुआती पुलिस जांच में पड़ोसी कल्लू को इस खौफनाक वारदात का मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया था। हालांकि, अदालती प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के दौरान यह साबित हुआ कि पुलिस ने जल्दबाजी में गलत कार्रवाई की थी और पीड़ित पक्ष के दबाव में आकर झूठी तहरीर पर हस्ताक्षर करवा लिए थे।
अदालत में सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह खुलासा हुआ कि तेजाब किसी पड़ोसी ने नहीं, बल्कि पारिवारिक विवाद के कारण असलम के अपने भाइयों रिजवान और फैजान ने फेंका था। अपर सत्र न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय की अदालत ने पुलिस विवेचना को त्रुटिपूर्ण मानते हुए निर्दोष कल्लू को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
न्यायालय ने अब असली आरोपियों रिजवान और फैजान को धारा 326ए और 506 के तहत तलब किया है और इस मामले का ट्रायल अब नए सिरे से शुरू होगा। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शुरुआती पुलिस जांच में होने वाली चूक किसी बेकसूर की जिंदगी को किस तरह बर्बाद कर सकती है, और निष्पक्ष न्याय के लिए अदालत की यह सख्ती बेहद जरूरी थी।
