कानपुर में सड़कों के गड्ढों पर व्यापारियों का प्रदर्शन, ‘कानपुर को गड्ढा मुक्त करो’ की उठी मांग
कानपुर की सड़कें इन दिनों गड्ढों से भरी पड़ी हैं, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे अधूरे निर्माण कार्य और लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जन्माष्टमी और गणेश महोत्सव जैसे प्रमुख त्योहारों के नजदीक आने के साथ, व्यापारियों ने आशंका जताई है कि सड़कों की इस दुर्दशा का सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ सकता है।
इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के नेतृत्व में नगर निगम गेट पर एक जोरदार प्रदर्शन किया गया। व्यापारियों ने थाली और बर्तन बजाकर अपना विरोध जताया और ‘कानपुर को गड्ढा मुक्त करो’ के नारे लगाए। उनका कहना है कि व्यापार को बचाना है तो शहर को गड्ढा मुक्त करना आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि शहर में हर तरफ सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिनमें पानी भरा हुआ है। कहीं सड़कें धंस गई हैं, तो कहीं निर्माण के बाद उन्हें अधूरा छोड़ दिया गया है। पैचवर्क का काम भी न के बराबर हो रहा है।
नगर निगम मुख्यालय में पिछले पांच दिनों से जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। 250 करोड़ रुपये के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं, जिससे शहर में त्राहि-त्राहि मची हुई है। वर्तमान में न तो सड़कों की मरम्मत हो रही है और न ही गड्ढों को भरा जा रहा है। जल निकासी की व्यवस्थाएं भी चरमरा गई हैं। ठेकेदार आगे का काम करने से कतरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें आगे फंसने का डर सता रहा है। अधिकारी केवल बयानबाजी तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत विकराल हो चुकी है। उच्चाधिकारियों को भी इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने की फुर्सत नहीं मिल पा रही है।
शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कों की हालत चिंताजनक है। बकरमंडी ढाल से बजरिया थाने के बीच 200 मीटर की दूरी तय करना भी मुश्किल हो गया है, जहां 38 गड्ढे बन चुके हैं। ब्रह्मनगर चौराहे से ईदगाह चौराहे के बीच सड़क धंसने से यह मार्ग बंद है और पिछले तीन दिनों से यहां कोई इंजीनियर नहीं पहुंचा है। जाजमऊ में सरैया चौराहे से जाने वाली एक लेन एक बड़े गड्ढे के कारण बंद है। बर्रा बाईपास से कर्रही जाने वाली रोड पर अनगिनत गड्ढे हैं। जरीबचौकी चौराहे से निकलना भी दुश्वार हो गया है। अफीम कोठी के पास सड़क धंसी हुई है, जिससे लक्ष्मीपुरवा के कई घर संकट में आ गए हैं। मकड़ीखेड़ा के लोग जलभराव से जूझ रहे हैं। गूबा गार्डेन से लेकर सरस्वती विहार तक यही स्थिति बनी हुई है। कल्याणपुर की 45 प्रतिशत सड़कें खराब हैं, जबकि दक्षिण क्षेत्र में स्थिति सबसे खराब है, जहां 50 से 60 प्रतिशत मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। डिप्टी का पड़ाव से नमक फैक्ट्री चौराहे तक पहुंचना भी मुश्किल है, क्योंकि बड़े गड्ढों में पानी भरा हुआ है।
