मीट कारोबार का 11.55 करोड़ का फर्जीवाड़ा, धनीपुर मंडी लाइसेंस का दुरुपयोग
अलीगढ़ के अतरौली में 11.55 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के मामले में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपी महिला ने बैंक में करंट अकाउंट खुलवाने के लिए धनीपुर मंडी, अलीगढ़ का लाइसेंस तो लगा दिया, लेकिन उस लाइसेंस पर मंडी में कभी एक रुपये का भी व्यापार नहीं किया। यह पूरा पैसा मीट कारोबार से जुड़ा था, जो कई जिलों में फैला हुआ है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, शन्नो ट्रेडर्स के एक्सिस बैंक खाते की केवाईसी (Know Your Customer) में धनीपुर मंडी अलीगढ़ का लाइसेंस लगाया गया था। इसमें फर्म का सालाना टर्नओवर 49 लाख रुपये दिखाया गया था और पता धनीपुर मंडी, थोक व आढ़तिया व्यापारी लिखा था। इसी आधार पर बैंक ने करंट अकाउंट खोल दिया।
मंडी सचिव ने खोला राज
जब पुलिस ने धनीपुर मंडी के सचिव मुकेश त्रिपाठी से संपर्क किया, तो पूरा खेल सामने आ गया। सचिव ने लिखित में बताया कि इस लाइसेंस नंबर पर पंजीकरण के बाद आज तक कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इस फर्म के नाम पर मंडी में कोई दुकान तक आवंटित नहीं है।
कई जिलों में फैला मीट कारोबार
जांच में पता चला कि यह पूरा पैसा मीट कारोबार का है। आरोपी महिला शन्नो ने खुद पूछताछ में बताया कि उसका पति शकील अल सना ट्रेडर्स के नाम से पशुओं का काम करता है। वे अतरौली, कासगंज, एटा, बुलंदशहर, हाथरस, मथुरा, फिरोजाबाद समेत कई जिलों में अपने लोगों के जरिए किसानों से भैंस और भैंसा खरीदते हैं। फिर उन पशुओं को अलीगढ़ की बड़ी मीट कंपनी फ्रिगेरियो कंजर्वा अलाना प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया जाता है। अलाना कंपनी से जो भुगतान आता है, वह सीधे शकील की फर्म अल सना ट्रेडर्स के खाते में आता है। वहां से उसे शन्नो ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
बैंक को गुमराह करने का प्रयास
महिला का कहना है कि बैंक से लोन लेने के लिए सिविल अच्छी करने को यह पैसा उसके खाते में डाला जाता था। पुलिस का मानना है कि मंडी लाइसेंस का प्रयोग सिर्फ बैंक को गुमराह करने के लिए किया गया। 49 लाख टर्नओवर दिखाकर 11.55 करोड़ रुपये का लेनदेन बैंक की नजर में आ गया और बैंक ने इसकी रिपोर्ट भेज दी। इसके अलावा, खाटू श्याम ट्रेडर्स के कृष्ण कुमार गौड़ ने भी अपने और अपनी मां लज्जा देवी के खाते से 50 लाख रुपये शन्नो ट्रेडर्स को भेजना स्वीकार किया है, जो इस नेटवर्क को और बड़ा बनाता है। इस तरह के फर्जीवाड़े से आम जनता को यह संदेश जाता है कि वित्तीय नियमों का पालन न करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
