निपुण भारत मिशन की नींव: क्रियाशील बालवाटिका पर जोर, शिक्षकों को प्रशिक्षण
कानपुर देहात में निपुण भारत मिशन को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। रसूलाबाद और झींझक ब्लॉक में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के समापन पर, शिक्षाधिकारियों ने शिक्षकों से निपुण लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एनसीईआरटी पुस्तकों को कक्षा शिक्षण में प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की।
विशेषज्ञों ने क्रियाशील बालवाटिका को निपुण भारत मिशन की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु में बच्चे सबसे तेजी से सीखते हैं, इसलिए आंगनबाड़ी में पढ़ रहे इस आयु वर्ग के बच्चों के मानसिक विकास के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। यही बच्चे भविष्य में परिषदीय विद्यालयों में नामांकित होंगे और उन्हें निपुण भारत मिशन के तहत निर्धारित दक्षताओं को प्राप्त कराना ही मुख्य लक्ष्य है।
क्रियाशील बालवाटिका में वंडर बॉक्स, जादुई पिटारा, बच्चों के लिए पोस्टर, क्ले, रंग और स्टेशनरी जैसी सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। इसी तरह, बालवाटिका कक्षाओं में कला, अभिनय, पठन और खेल के लिए अलग-अलग कोने निश्चित होने चाहिए और छात्र प्रोफाइल प्रदर्शित होना चाहिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विद्यालय के नोडल शिक्षकों को बालवाटिका हस्तपुस्तिका के माध्यम से 5 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए निर्धारित गतिविधियां संपन्न करानी होंगी। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा निर्धारित शैक्षिक लक्ष्यों को प्राप्त करे, जिससे देश के भविष्य को मजबूत बनाया जा सके।
