कानपुर बाल गृह में किशोरियों का डांस व सिलाई में अधिक क्रेज: सर्वे
कानपुर। राजकीय बाल गृह (बालिका) में किशोरियों की भविष्य संवारने की चाहत ने एक नया रुझान दिखाया है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के समाज कार्य विभाग द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, किशोरियां कुकिंग या आर्ट्स एंड क्राफ्ट सीखने की बजाय योग, डांस और सिलाई जैसे हुनर सीखने को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं। यह सर्वे 200 से अधिक किशोर-किशोरियों पर किया गया, जिसमें आत्मनिर्भर बनने की उनकी इच्छा स्पष्ट रूप से सामने आई।
सर्वे के नतीजों के मुताबिक, लगभग 40 फीसदी किशोरियां डांस व योगा सीखना चाहती हैं, जबकि 30 फीसदी सिलाई-कढ़ाई में रुचि रखती हैं। ब्यूटीशियन और वेलनेस कोर्स की ओर 27 फीसदी किशोरियों का झुकाव है। खेल और शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रमशः 26 फीसदी और 25 फीसदी किशोरियां अपना भविष्य देखती हैं। इसके विपरीत, पारंपरिक रूप से लड़कियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले कुकिंग (8 फीसदी), आर्ट्स एंड क्राफ्ट (15 फीसदी) और म्यूजिक (17 फीसदी) के प्रति उनकी रुचि सबसे कम पाई गई।
सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्युमिनिटीज एवं सोशल साइंसेज के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों को ऐसे प्रशिक्षण देना है जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में इन किशोर-किशोरियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। यह रुझान दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी अपने भविष्य के लिए व्यावहारिक और स्वरोजगार-उन्मुख कौशल को अधिक महत्व दे रही है।
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