हाईटेक चोरों का गैंग पकड़ा, ऑन डिमांड लग्जरी कारें चुराने का खुलासा
आगरा पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ऑन डिमांड लग्जरी कारें चुराता था। इस अंतर्राज्यीय गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से 1.86 करोड़ रुपये कीमत की 11 लग्जरी कारें बरामद हुई हैं। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें खुद भी याद नहीं है कि उन्होंने कितनी गाड़ियां बाजार में बेच दी हैं। यह गिरोह इतना शातिर था कि सर्विस सेंटरों तक में सेंध लगाकर गाड़ियों की रिमोट प्रोग्रामिंग कॉपी कर लेता था, जिससे सेंट्रल लॉक का सायरन भी नहीं बजता था।
मामले का खुलासा जयपुर हाउस से 29 जून को हुई एक होंडा डब्ल्यूआरवी की चोरी के बाद हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पाया कि चोर कार से ही आए थे और उन्होंने बेहद हाईटेक तरीके से वारदात को अंजाम दिया। चोरी की गाड़ी में लगी जीपीएस डिवाइस को भी रास्ते में निकालकर फेंक दिया गया था। इसी के बाद पुलिस ने गिरोह की तलाश शुरू की।
गिरोह का सरगना अभिषेक वाजपेई उर्फ सत्यम पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। वह अपनी प्रेमिका के साथ कार में था, जब पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की। उसने कार को बैक गियर में दौड़ाया और कूदकर दूसरी कार में बैठकर फरार हो गया। युवती से पूछताछ में पुलिस को कुछ मोबाइल नंबर मिले, लेकिन उसे अपने आशिक के वाहन चोर होने की जानकारी नहीं थी।
पुलिस की टीमों ने बस्ती, हरदोई, लखनऊ, सीतापुर, दिल्ली, मथुरा, हरियाणा, नोएडा और गाजियाबाद तक दबिश देकर गिरोह के सदस्यों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों में विवेक रावत का आपराधिक इतिहास लंबा है और उसके खिलाफ एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
बरामद की गई 11 लग्जरी गाड़ियों में दो टाटा हैरियर, होंडा सिटी, थार, होंडा डब्ल्यूआरवी, किआ कैरेंस, वरना, ईको स्पोर्ट, आई-20 और टाटा पंच शामिल हैं। इनकी कुल कीमत 1.86 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 19 रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, 13,000 रुपये नकद और नौ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, चोरी की गई गाड़ियों को बस्ती के एसडी कार बाजार में बेचा जाता था, जिसे संतोष कुमार नाम का आरोपी चलाता था। गिरोह किसी भी गाड़ी को चुराने से पहले उसी मॉडल की टोटल लॉस (क्षतिग्रस्त) गाड़ी खरीदता था और चोरी की गाड़ी पर उसका नंबर लगाकर उसे ‘नंबर एक’ का बना देता था।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि आजकल ज्यादातर गाड़ियों में पुश बटन स्टार्ट और इम्मोबिलाइजर सिक्योरिटी चिप वाली चाबियां होती हैं। चोरों का गिरोह इसी हाईटेक सिक्योरिटी फीचर में सेंध लगाने की कला सीख रहा था। वे कार की स्टीयरिंग व्हील के नीचे ओबीडी पोर्ट में एक प्रोग्रामिंग डिवाइस कनेक्ट कर चाबी का पूरा डेटा कॉपी कर लेते थे। एक एच डिवाइस का उपयोग करके वे रिमोट से डेटा कॉपी करते थे, जिससे सेंट्रल लॉकिंग का सायरन बंद हो जाता था। सूजे की मदद से कार खोलने के बाद वे ओबीडी पोर्ट से लैपटॉप कनेक्ट करके गाड़ी स्टार्ट कर लेते थे। कुछ दूर जाकर वे जीपीएस डिवाइस को निकालकर फेंक देते थे।
इस तरह की चोरियों से आम जनता की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि उनकी मेहनत की कमाई से खरीदी गई गाड़ियां पल भर में चोरी हो सकती हैं। यह घटना वाहन सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है।
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