रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद सागर गुप्ता का शव कानपुर पहुंचा, परिवार में मातम
शास्त्री नगर निवासी मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद रूस से कानपुर पहुंचा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान काला सागर में यूक्रेन के ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई थी। शव को देखते ही पत्नी शालू और मां रामा देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। साढ़े चार साल की बेटी गौरी अपने पिता को सोता हुआ समझकर उठने के लिए कह रही थी। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है, और यह भारत के उन नागरिकों के लिए एक दुखदReminder है जो वैश्विक संघर्षों में फंसे हुए हैं।
सागर का शव मास्को से फ्लाइट द्वारा नई दिल्ली लाया गया, जहां से एंबुलेंस से उसे कानपुर पहुंचाया गया। जैसे ही शव को एंबुलेंस से उतारा गया, पत्नी शालू दहाड़े मारकर रो पड़ीं। मां रामा देवी अपने बेटे की आखिरी झलक पाने के लिए बेताब थीं। अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह भैरोघाट में किया जाएगा।
परिवार ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सागर का शव तिरंगे में नहीं लाया गया। उन्होंने सरकार से शव को तिरंगे में भेजने की मांग की। इसके अलावा, परिवार ने पत्नी के लिए सरकारी नौकरी, 2 करोड़ रुपये का मुआवजा और सागर को शहीद का दर्जा या वीरता पुरस्कार देने की मांग की है। प्रशासन ने शव को घर में फ्रीजर में रखवाया है और मांगों को सुना है।
सागर गुप्ता 2018 में मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे और 15 जून को इस्तांबुल से रूस के लिए कार्गो शिप पर सवार हुए थे। 21 जुलाई को उनके सहकर्मियों ने ड्रोन हमले में उनकी मौत की सूचना दी थी। उनके परिवार में पत्नी, मां, सात महीने का बेटा, पांच साल की बेटी और एक बहन हैं।
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