धोखाधड़ी से नानी का मकान बेचने के आरोपित को तीन साल की सजा, धीरज मोहिले को कोर्ट ने सुनाई सजा
बुजुर्ग एवं विधवा नानी के साथ धोखाधड़ी कर उनका मकान बेचने के मामले में आरोपित पोते धीरज मोहिले को अदालत ने तीन वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में 16 साल बाद आरोपी को उसके कृत्य की सजा मिली है।
यह मामला वर्ष 2008 में तब सामने आया जब नानी ने अपनी बेटी के पुत्र धीरज मोहिले के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का परिवाद दायर किया। नानी का आरोप था कि धीरज ने पेंशन दिलाने के बहाने खाली और हिंदी में लिखे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए थे। इसके बाद, उसने तहसील ले जाकर स्टांप पेपर पर भी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगवाए। जब नानी ने पेंशन के बारे में पूछा तो धीरज ने कहा कि स्कीम बदल गई है और पेंशन नहीं मिलेगी।
बाद में, अगस्त 2008 में, धीरज नानी को फिर तहसील ले गया और मकान बदलने की बात कहकर 24 अगस्त 2008 को उसके मकान में सामान रखवा दिया। नानी को तब पता चला कि धीरज ने धोखाधड़ी से उनके मकान का एग्रीमेंट और फिर बैनामा अपने नाम करा लिया था। इस घटना ने बुजुर्गों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है, जिससे उनकी संपत्ति और सुरक्षा पर खतरा मंडराता है।
