कानपुर में घटिया किट खरीद पर जांच, भ्रष्टाचार के दस्तावेज खंगाले
कानपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में घटिया गुणवत्ता की जांच किट खरीद प्रकरण को लेकर मंगलवार को हड़कंप मच गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एक विशेष जांच टीम ने सुबह से लेकर शाम तक सीएमओ कार्यालय में डेरा डाले रखा। टीम ने बंद कमरे में करीब छह घंटे तक भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की और इस मामले में तत्कालीन सीएमओ सहित करीब आधा दर्जन अधिकारियों से पूछताछ भी की।
यह पूरा मामला फरवरी 2025 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. आलोक रंजन द्वारा मलेरिया और एचआईवी जांच किट की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से टेंडर हासिल कर रही जेएम फार्मा को यह टेंडर मिला था और फर्म ने किट की आपूर्ति भी की थी। हालांकि, नए सीएमओ हरिदत्त नेमी को प्राप्त किट मानक के विपरीत और घटिया गुणवत्ता की मिलीं, जिसके बाद उन्होंने फर्म पर धांधली के आरोप लगाए और भ्रष्टाचार में कई अधिकारियों की संलिप्तता का भी संकेत दिया।
जांच शुरू होने पर जेएम फार्मा के संचालक राजेश शुक्ला ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसमें विशेष सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य धीरेंद्र सचान, डायरेक्टर प्रशासन निधि गौतम और वित्त नियंत्रक दीपक कुमार को शामिल किया गया। इसी कमेटी ने मंगलवार को कानपुर सीएमओ कार्यालय पहुंचकर जांच को आगे बढ़ाया। सीएमओ हरिदत्त नेमी ने जांच टीम के संबंध में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। इस जांच से स्वास्थ्य विभाग में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और आम जनता को घटिया स्वास्थ्य सेवाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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