लखनऊ में फलों के राजा आम का वार्षिक महोत्सव इस बार कुछ खास नई प्रजातियों के साथ शुरू हुआ है। महोत्सव स्थल पर लगभग 800 आम की किस्मों के बीच, 'कृष्णा मैंगो' और 'लाल सुंदरी'...
लखनऊ में फलों के राजा आम का वार्षिक महोत्सव इस बार कुछ खास नई प्रजातियों के साथ शुरू हुआ है। महोत्सव स्थल पर लगभग 800 आम की किस्मों के बीच, ‘कृष्णा मैंगो’ और ‘लाल सुंदरी’ नामक दो नई प्रजातियों ने लोगों का ध्यान खींचा है। इन दुर्लभ किस्मों को देखने के लिए पहले दिन ही भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह तीन दिवसीय आयोजन 5 जुलाई तक चलेगा। महोत्सव में ‘मोदी मैंगो’ और ‘योगीराज’ जैसी प्रजातियों के आमों ने भी लोगों को खूब लुभाया।
आम की नई प्रजातियां विकसित करने वाले सुरेश चंद शुक्ला को उनके प्रयासों के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने अब तक 262 से अधिक आम की नई प्रजातियों को विकसित करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस वर्ष उन्होंने ‘कृष्णा’ किस्म लॉन्च की है, जिसकी खासियत यह है कि यह साल भर पैदावार देती है, जबकि ‘लाल सुंदरी’ मई से अगस्त तक उपलब्ध रहती है।
बस्ती के रिसर्च सेंटर के प्रभारी अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 40 नई प्रजातियां विकसित की जा चुकी हैं। इनमें ‘नाजुक बदन’ और ‘इमाम पंसद’ जैसी रसीली किस्में चर्चा में रहीं। इसके अलावा तोतापरी, बैगन पल्ली, केसर, वनराज, गुलाब खास, मल्लिका, अम्रपाली जैसी किस्में भी महोत्सव में रौनक बढ़ा रही हैं।
आम की कुछ किस्मों के नाम विदेशी आमों की तर्ज पर रखे गए हैं, जैसे ‘ताईवान रेड मैंगो’, ‘इंडोनेशिया’, ‘बाम्बे एलो’, और ‘बेस्ट बंगाल’। ये विदेशी नाम वाली किस्में भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं। महोत्सव में चूसने वाली किस्मों के साथ-साथ मिर्चापुर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से ड्रैगनफ्रूट के स्टॉल भी लगाए गए हैं।
उद्यान विभाग की ओर से लगाए गए स्टॉलों में करीब 40 प्रजातियां प्रदर्शित की गईं। इनमें डेढ़ किलो वजनी ‘हाथी झूला’ आम और ‘नूरजहां’ की नई प्रजाति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसका एक आम करीब एक किलो का होता है। स्टॉल संचालकों के अनुसार, ये किस्में बाजारों में भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इस महोत्सव में आम की नई किस्मों का प्रदर्शन न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि प्रदेश की कृषि नवाचार को भी बढ़ावा देता है।