अमेरिका-ईरान शांति समझौता: मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद, India का स्वागत
अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है, जिससे मध्य पूर्व में दशकों से चला आ रहा तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता हो गया है। ईरान ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कई महीनों की मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने शांति समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है।
इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटा दिया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने जहाजों को तेल का प्रवाह जारी रखने का संकेत दिया है।
शांति समझौते का मार्ग
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस पीस डील पर हस्ताक्षर करेंगे। यदि यह समझौता होता है, तो यह 47 वर्षों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच पहली उच्च-स्तरीय बैठक होगी।
ईरान की तीन शर्तें
समझौते के दस्तावेज अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि समझौते के बाद होने वाली 60 दिन की बातचीत अमेरिका द्वारा तीन वादे पूरे करने पर निर्भर करेगी। इन वादों में नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, सभी सैन्य कार्रवाई रोकना और ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना शामिल है।
इजराइल का रुख और लेबनान का मुद्दा
इस बीच, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में इजराइली सेना अनिश्चित काल तक तैनात रहेगी ताकि इजराइल की सीमाओं को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, लेबनान के कुछ निवासी अपने गांवों की ओर लौटते दिखाई दिए हैं, लेकिन इजराइली सेना की अनुमति पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावे के विपरीत, इजराइल ने लेबनान से अपनी सेना न हटाने का रुख स्पष्ट किया है। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने अमेरिका-ईरान पीस डील पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता।
भारत का स्वागत
भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया है। भारत को उम्मीद है कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी, समुद्री मार्गों पर व्यापार सामान्य रूप से जारी रहेगा और बाकी बचे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़कर एक स्थायी समझौते तक पहुंचेगी।
