दलित बिजली इंजीनियरों पर कार्रवाई: पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने दी आंदोलन की चेतावनी, UP politics news
उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में दलित अभियंताओं पर की जा रही कथित एकतरफा कार्रवाई को लेकर पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन (Power Officers Association) में उबाल है। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि अगर दलित अभियंताओं को जल्द न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करेंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन की होगी। संगठन ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है।
दलित अभियंताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप
एसोसिएशन की आपात बैठक में यह तय हुआ कि अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि दलित अभियंताओं को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि अभियंताओं पर की जा रही कार्रवाई सेवा नियमों के साथ-साथ सामाजिक न्याय की मूल भावना के भी विपरीत है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि दलित अभियंताओं का निलंबन, पदोन्नति रोकना और अनुचित दंड देना आम बात हो गई है, और उन्हें राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
कई अभियंताओं पर कार्रवाई के उदाहरण
बैठक में कई ऐसे मामलों को उजागर किया गया जहां दलित अभियंताओं के साथ अन्याय हुआ है। इनमें से कुछ प्रमुख मामले हैं:
– नेकीराम (अधीक्षण अभियंता) को मात्र 6 दिन की तैनाती के बाद प्रतिकूल प्रविष्टि देकर मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति रोक दी गई।
– पूरन चंद (अधीक्षण अभियंता) व नरेश कुमार (अधिशासी अभियंता) लगभग एक वर्ष से निलंबित हैं, जिससे उनकी पदोन्नति बाधित हुई है।
– अजय कुमार (अधीक्षण अभियंता) को फर्जी शिकायतों के आधार पर निलंबित किया गया।
– निर्भय कुमार (अधिशासी अभियंता) को एक ही मामले में दोहरा दंड दिया गया।
– हरिश्चंद्र वर्मा (मुख्य अभियंता) को गलत आरोपों में छह महीने से निलंबित रखा गया है, जबकि उनकी पत्नी की लगातार डायलिसिस चल रही है।
– मुकेश बाबू (अधीक्षण अभियंता) को हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद पदोन्नत नहीं किया गया।
– पवन कुमार अधिशासी अभियंता लंबे समय से निलंबित हैं।
यह स्थिति प्रदेश में कार्यरत दलित अभियंताओं के मनोबल को तोड़ने वाली है और सार्वजनिक सेवाओं में निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
