कानपुर में आवारा कुत्तों को मिलेगी माइक्रोचिप, नगर निगम की नई पहल से होगी पहचान
कानपुर शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर नगर निगम एक नई और अनूठी पहल करने जा रहा है। अब नसबंदी किए गए सभी आवारा कुत्तों में माइक्रोचिप लगाई जाएगी। इस चिप के माध्यम से न केवल कुत्तों की पहचान सुनिश्चित होगी, बल्कि उनकी लोकेशन भी ट्रैक की जा सकेगी। यह तकनीक यह जानने में भी मदद करेगी कि कुत्ता जीवित है या नहीं, और भविष्य में नसबंदी के लिए उसे दोबारा पकड़ने की गलती से भी बचा जा सकेगा।
यह पहल चेन्नई में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल की जा रही तकनीक पर आधारित है। कानपुर के नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने इस तकनीक को शहर में लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया है कि चेन्नई प्रोजेक्ट का ड्राफ्ट मंगाकर तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करें, साथ ही निगरानी के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर भी मंगाया जाए।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के अनुसार, वर्तमान में नसबंदी के बाद कुत्तों की पहचान के लिए कान में वी-शेप कट (इयर नॉचिंग) या नर कुत्तों के अंडकोष निकालने जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। हालांकि, मादा कुत्तों की पहचान में अक्सर मुश्किलें आती हैं। माइक्रोचिप लगने से हर कुत्ते की एक विशिष्ट आईडी होगी और उसकी लोकेशन भी पता चल जाएगी।
माइक्रोचिप को इंजेक्शन के जरिए कुत्ते की खाल में इम्प्लांट किया जाएगा। इससे एक यूनिक पहचान नंबर जेनरेट होगा, जो सॉफ्टवेयर से कनेक्टेड रहेगा। इस सॉफ्टवेयर को एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में इंस्टॉल किया जाएगा, जिससे मॉनीटर पर कुत्तों की लोकेशन देखी जा सकेगी। यह पहली बार होगा जब आवारा कुत्तों की नसबंदी के बाद उनकी पहचान के लिए माइक्रोचिप का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि अब तक यह तकनीक केवल पालतू कुत्तों के लिए इस्तेमाल होती रही है।
