कासगंज में आग से निपटने के इंतजाम बढ़ाए जाएं: ग्रामीण
गर्मी का मौसम दस्तक देते ही कासगंज जनपद में आग लगने की घटनाओं में तेजी आ जाती है। गेहूं और सरसों की कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसलें, लू चलने की आशंका और जरा सी चिंगारी से लगने वाली आग ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अग्निश्मन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन न होने के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
आग से बचाव के लिए संसाधनों की मांग
ढोलना क्षेत्र सहित जिले के अन्य हिस्सों के ग्रामीणों ने आगामी गर्मी में आग की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाने की समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि आग से निपटने के लिए केवल प्रशासन और अग्निश्मन विभाग की ही नहीं, बल्कि जनता की भी जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने अपने घरों, खेतों और दुकानों में आग से बचाव के इंतजाम रखने की अपील की है। साथ ही, चूल्हे की आग को खुला न छोड़ने और बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
दमकल गाड़ियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि अग्निश्मन विभाग के पास संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था हो और दमकल गाड़ियां जिले के क्षेत्रफल के अनुसार हों। तीन तहसीलों, दस नगर निकायों और नगर पंचायतों वाले जिले में कम से कम प्रत्येक नगर पालिका और नगर पंचायत पर एक दमकल गाड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, और अग्निश्मन केंद्र स्थापित कर क्षमता बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके और नुकसान कम हो। गंगा की कटरी जैसे अतिसंवेदनशील इलाकों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
जागरूकता और जनसहभागिता पर जोर
ग्रामीणों ने आग से निपटने और बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्हें यह जानकारी दी जानी चाहिए कि वे आग की घटनाओं पर काबू पाने में कैसे सहयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, घरों और प्रतिष्ठानों में आग बुझाने के उपकरण रखने के महत्व को भी समझाया जाना चाहिए। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे आग लगने की घटनाओं की सूचना समय पर विभाग तक पहुंचाएं, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष बचाव उपायों पर काम करने की जरूरत है।
