जंग के बीच ईरान को China से मिल रही मदद? अमेरिका के निशाने पर दो जहाज
ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी (IRISL) के दो जहाज- शब्दीस और बर्जिन- चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई है। इन जहाजों पर ऐसा मिलिट्री केमिकल लदा होने की आशंका है, जो रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होता है। यह खेप ऐसे समय में भेजी जा रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अगर यह केमिकल ईरान तक पहुंचता है, तो इससे जंग लंबी खींच सकती है।
फिलहाल दोनों जहाज साउथ चाइना सी पार करके मलक्का स्ट्रेट के करीब पहुंच गए हैं। इन्हें ईरान पहुंचने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पार करना होगा, जहां अमेरिकी और ईरानी बेड़े तैनात हैं। अमेरिकी नेवी ने हाल ही में श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को Mk-48 टॉरपीडो से डुबो दिया था। यह फ्रिगेट युद्धक्षेत्र से करीब 3 हजार किमी दूर था और जंग में शामिल भी नहीं था। यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका ईरानी जहाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के डिप्टी डायरेक्टर हैरिसन प्रेटैट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद है। पहले रोजाना औसतन 153 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा 13 हो गया है। ऐसे में अगर शब्दीस और बर्जिन हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़े तो अमेरिकी नेवी इन पर हमला कर सकती है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चीन की ओर से ईरान को सोडियम परक्लोरेट की खेप भेजने के पीछे रणनीतिक कारण हैं। अमेरिकी थिंकटैंक वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ग्रांट रमली के अनुसार, चीन के लिए ईरान केवल एनर्जी सोर्स नहीं, बल्कि रणनीतिक ढाल भी है। अगर ईरान से तेल सप्लाई रुकी, तो चीन की निर्भरता सऊदी अरब या रूस पर बढ़ेगी। चीन ऐसा नहीं चाहता।
चीन ने एक तरफ अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले की निंदा की थी और सीजफायर की अपील की थी। वहीं, दूसरी तरफ युद्ध के बीच ऐसे फैसले ले रहा है। अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में चाइना स्टडीज के सीनियर फेलो आइसैक कार्डन के मुताबिक, चीन इन जहाजों को कुछ और दिन पोर्ट पर रोक सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। यह दिखाता है कि चीन शांति की बात करते हुए भी ईरान का समर्थन कर रहा है।
