आईटीसी हेराफेरी: बगैर सत्यापन खुली फर्में, GST जांच पर उठे सवाल
भोले-भाले नागरिकों के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां स्थापित की जा रही हैं। इन फर्जी इकाइयों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। लगातार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद, यह सवाल बना हुआ है कि जीएसटी निगरानी टीमें इन धोखाधड़ी की समय पर पहचान क्यों नहीं कर पा रही हैं। वर्ष 2025-26 में अब तक, राज्य जीएसटी टीम ने 425 फर्जी फर्मों का खुलासा किया है, जिनमें से 309 का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है। लगभग 10 ऐसी फर्मों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है।
इसके बावजूद, कागजों पर कारोबार दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये का आईटीसी क्लेम करने वालों का हौसला कम नहीं हुआ है। राज्य जीएसटी के अपर आयुक्त ग्रेड 2, कुमार आनंद के अनुसार, फर्जी आईडी पर बोगस फर्म बनाने वाले ज्यादातर केंद्रीय जीएसटी से जुड़े होते हैं। उनके स्तर पर ऐसी सूचना केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों को दी जाती है, और वहीं से उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होती है। राज्य जीएसटी से जुड़े पंजीकरणों में ऐसी हेराफेरी बहुत कम देखने को मिली है। फिलहाल, ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जांच की कड़ी कमजोर होने का फायदा उठाया जा रहा है। फर्जी फर्मों का संचालन करने वाले विभागीय जांच की इस कमजोरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। जीएसटी पंजीकरण के समय आधार-आधारित सत्यापन, स्थल निरीक्षण और दस्तावेज़ जांच की व्यवस्था है। इसके बावजूद अगर फर्जी फर्में बन रही हैं, तो कहीं न कहीं जांच की कड़ी कमजोर है। जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी ईमेल, मोबाइल नंबर और किराये के पते के सहारे पंजीकरण करा लिया जाता है, जिसका पता लगाने में विभागीय अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि ईमानदार कारोबारी अनावश्यक जांच से परेशान होते हैं, जबकि फर्जी फर्में सिस्टम की कमियों का फायदा उठा लेती हैं। अब जरूरत है कि पंजीकरण से लेकर आईटीसी क्लेम तक हर स्तर पर तकनीकी और फील्ड निगरानी को और मजबूत किया जाए। इस तरह की धोखाधड़ी से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता है और ईमानदार व्यवसायों के लिए प्रतिस्पर्धा को विकृत करता है।
