कानपुर देहात ज्वार खरीद घोटाला: डीएम जांच करें, 1250 क्विंटल की खरीद पर सवाल
रसूलाबाद कस्बे में संचालित विपणन केंद्र पर धान के साथ ही ज्वार खरीद में बड़े खेल का खुलासा हुआ है। आरोप है कि क्षेत्र में ज्वार की एक दाना पैदावार न होने के बावजूद साढ़े बारह सौ क्विंटल ज्वार की खरीद कर ली गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तहसील स्तर से कागजों का सत्यापन भी कर दिया गया है।
यह खरीद किसानों से ज्यादा बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के इरादे से की गई। स्थानीय तहसील क्षेत्र के किसी भी गांव में ज्वार की पैदावार नहीं होती है, फिर भी 26 से 31 दिसंबर के बीच 1250 क्विंटल ज्वार की खरीद कागजों पर दर्शाई गई है। दीपक गुप्ता, विनय शुक्ला, रणधीर सिंह, राजेश कुमार और अंकित गुप्ता जैसे लोगों के नाम से क्रमशः 50, 70, 80, 80 और 100 क्विंटल ज्वार की खरीद कानपुर देहात निवासी के तौर पर दिखाई गई है। कुल 21 किसानों से खरीद पोर्टल पर दर्ज है।
खेल करने के उद्देश्य से विक्रेताओं के नाम के आगे गांव का नाम दर्ज न करके सीधे जनपद का नाम दर्ज किया गया है। बाजार में ज्वार का मूल्य 2100 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि सरकारी खरीद मूल्य 3745 रुपये प्रति क्विंटल था। इस प्रकार प्रति क्विंटल करीब डेढ़ हजार रुपये के अंतर से विभागीय अधिकारियों और बिचौलियों ने बड़ा मुनाफा कमाया है। इसी तरह धान खरीद में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
केंद्र प्रभारी पुष्कर झा ने स्वीकार किया कि उन्हें क्षेत्र में ज्वार पैदा होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अभिलेख देखकर ही खरीद की मात्रा बता पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसान ज्वार लेकर आए थे, जिस पर खरीद की गई। हालांकि, जानकारी के अनुसार ज्वार की खरीद रसूलाबाद केंद्र पर न होकर अकबरपुर में कराई गई और वहां से माल डिस्पैच कर दिया गया। यह पूरा मामला सरकारी खरीद प्रणाली में बिचौलियों के गहरे दखल और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिससे आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
