उत्तर प्रदेश विधान परिषद में गूंजा DM के फोन न उठाने का मामला, MLC ने उठाया सवाल | UP politics news
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान बस्ती जनपद से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सदन में चर्चा का विषय बन गया। शिक्षक नेता एवं एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बस्ती के जिलाधिकारी के सीयूजी नंबर पर फोन न उठाए जाने का मुद्दा उठाया, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। यह घटना दर्शाती है कि आम जनता के लिए भी अधिकारियों तक पहुंच कितनी मुश्किल हो सकती है।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने सदन को बताया कि उन्होंने एक आवश्यक कार्य के सिलसिले में बस्ती के जिलाधिकारी को कई बार फोन किया। काफी देर तक घंटी बजती रही, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। बाद में जब कॉल रिसीव हुआ तो सामने वाले व्यक्ति ने स्वयं को डीएम का अर्दली बताया। एमएलसी ने अपना परिचय दिया, लेकिन अर्दली उनकी बात समझ नहीं सका और उलटा पूछ बैठा कि ‘एमएलसी क्या होता है?’ इस जवाब से सदन में कुछ देर के लिए हास्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, लेकिन इसके पीछे जनप्रतिनिधियों की गरिमा और प्रशासनिक शिष्टाचार का गंभीर मुद्दा छिपा था।
एमएलसी ने जोर देकर कहा कि यह केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों की गरिमा से जुड़ा विषय है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि जिलाधिकारी को निर्देशित किया जाए कि कम से कम जनप्रतिनिधियों के फोन का समय से उत्तर दिया जाए, ताकि जनता से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। इस मुद्दे के उठने के बाद सदन में प्रशासनिक जवाबदेही, प्रशासनिक शिष्टाचार और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई।
इस मामले में विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने यह भी बताया कि एक डीएम द्वारा जनप्रतिनिधि का फोन न उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, और उससे भी गंभीर बात यह है कि उन्होंने पलटकर कॉल भी नहीं किया। शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि किसी कारणवश फोन रिसीव न हो सके तो 10 मिनट के भीतर कॉल बैक किया जाए। जब एक जनप्रतिनिधि के साथ डीएम का यह रवैया है, तो आम जनता के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, जो `UP politics news` में अक्सर चर्चा का विषय बनता है।
वहीं, जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्सना ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि निर्वाचन आयोग की वीडियो कांफ्रेंसिंग चल रही थी, जो तीन घंटे से अधिक चली। इस दौरान फोन अर्दली के पास था। उन्होंने कहा कि अर्दली ने माननीय एमएलसी को सम्मान के साथ पूरी बात बताई थी। फिर भी, उन्होंने इस स्थिति को ‘अनफॉर्चुनेट’ और ‘खेदजनक’ बताया। ध्रुव कुमार त्रिपाठी उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे हैं और शिक्षा जगत के मुद्दों पर सदन में मुखर रहते हैं।
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