कासगंज में Wetlands बचाने की मांग तेज, पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी Kasganj news
तेजी से गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच झीलों और वेटलैंड्स (आर्द्र भूमियों) का संरक्षण आज केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का सवाल बन चुका है। हाल ही में विश्व आर्द्र भूमि दिवस के अवसर पर कासगंज में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने इन जलस्रोतों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उनका मानना है कि वेटलैंड्स मानव सभ्यता की जीवनरेखा हैं, जो प्राकृतिक जल प्रबंधन प्रणाली के रूप में कार्य करती हैं।
वेटलैंड्स का महत्व: जल प्रबंधन और जैव विविधता
विशेषज्ञों के अनुसार, वेटलैंड्स वर्षा के अतिरिक्त जल को अपने भीतर समाहित कर बाढ़ की तीव्रता को कम करते हैं, वहीं सूखे के समय भूजल पुनर्भरण कर जल संकट से राहत देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, पशुपालन और मत्स्य पालन प्रत्यक्ष रूप से इन्हीं जल स्रोतों पर निर्भर हैं। वेटलैंड्स को जैव विविधता का हॉटस्पॉट भी कहा जाता है। यहां जल पौधे, शैवाल, मछलियां, मेंढक और पक्षी मिलकर एक जटिल खाद्य श्रृंखला का निर्माण करते हैं। सर्दियों में देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षी इन वेटलैंड्स को अपना अस्थायी आवास बनाते हैं, जो इनके स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का संकेत होता है।
कासगंज में वेटलैंड्स की स्थिति
उपग्रह आधारित दूरसंवेदी सर्वेक्षण और राजस्व विभाग के सत्यापन के अनुसार, कासगंज जनपद में 2.5 हेक्टेयर से बड़े लगभग 120 वेटलैंड्स की पहचान की गई है। इनमें से हरिपदी आदिगंगा, दरियावगंज झील, रामछितौनी, नकरा, बस्तौली ब्रह्मपुर, सिकंदरपुर खुर्द, होडलपुर, सादिकपुर और जौहरी के वेटलैंड्स प्रमुख हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि कासगंज जल और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र है।
संरक्षण के लिए जन आंदोलन की मांग
संवाद में शामिल नागरिकों ने कहा कि वेटलैंड्स को अक्सर अतिक्रमण और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। पर्यावरणविदों ने जोर दिया कि यदि जंगल धरती के फेफड़े हैं, तो वेटलैंड्स धरती के गुर्दे हैं, क्योंकि ये जल को प्राकृतिक रूप से फिल्टर कर प्रदूषक तत्वों को अवशोषित करते हैं। इनके नष्ट होने का अर्थ है जैव विविधता का नुकसान और जलवायु संतुलन का बिगड़ना। नागरिकों ने मांग की है कि वेटलैंड संरक्षण कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और इसे जन आंदोलन बनाया जाए। इसके साथ ही, पर्यावरण पर्यटन को वेटलैंड संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाने की भी वकालत की गई, जिससे स्थानीय रोजगार भी पैदा हो सके।
