Myanmar Election: सैन्य शासकों को बहुमत मिलने की उम्मीद, लोकतंत्र पर उठे सवाल
म्यांमार में आम चुनाव का अंतिम चरण संपन्न हो चुका है, जिसके साथ ही देश के सैन्य शासकों और उनके सहयोगियों को संसद में बहुमत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस चुनाव प्रक्रिया को लेकर आलोचकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह चुनाव न तो स्वतंत्र था और न ही निष्पक्ष।
चुनाव का मुख्य उद्देश्य फरवरी 2021 में आंग सान सू की की निर्वाचित नागरिक सरकार को सत्ता से बेदखल करने के बाद सेना की शक्ति को वैधता प्रदान करना था। सैन्य समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) ने पहले दो चरणों के मतदान में अधिकांश सीटें जीत ली थीं।
म्यांमार की राष्ट्रीय संसद के ऊपरी और निचले सदनों में 25 प्रतिशत सीटें सेना के लिए आरक्षित हैं। यह आरक्षण सेना और उसके सहयोगियों को विधायिका पर नियंत्रण सुनिश्चित करता है, भले ही जनता का रुझान कुछ भी हो। मौजूदा सैन्य सरकार के प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग के बारे में यह माना जा रहा है कि नई संसद के गठन के बाद वे राष्ट्रपति पद संभालेंगे।
